Monday , December 18 2017

पाकिस्तान में एलाहिदगी की ज़बान बनी उर्दू: यूनेस्को

इस्लामबाद :जबान के दोधारी तलवार हो सकने के बारे में इन्त्बाह देते हुए यूनेस्को ने कहा है कि पाकिस्तानी स्कूलों में उर्दू का लगातार इस्तेमाल इस मूतफर्र्कात जातीय मुल्क को सियासी तनाव की ओर ले गया है. साथ ही इसने यह सिफारिश की है कि बच्चों को उसी जबान में तालीम देनी चाहिए जिसे वे समझते हैं.

‘योमे माद्री ज़बान’ के मोके पर यूनेस्को ने एक पॉलिसी ख़त जारी करते हुए तुर्की, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ग्वाटेमाला में मुत्फर्र्का जातीय समाजों का हवाला दिया और इस बात की सिफारिश की कि बच्चों को उस जबान में तालीम दी जाए जिन्हें वे समझते हैं.

यूनेस्को ने शुक्रवार को पब्लिश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के सरकारी स्कूलों में उर्दू जबान को हिदायत जुबान की तरह लगातार इस्तेमाल किए जाने ने भी सियासी तनाव को बढ़ाया है.

उसके मुताबिक पाकिस्तान में आठ फीसद से भी कम आबादी उर्दू जबान बोलती है. यूनेस्को ने कहा कि आजादी के बाद पाकिस्तान ने अपना गठन होने पर कोमी जुबान के तौर में और स्कूलों में हिदायती ज़बान के तौर पर उर्दू का इस्तेमाल कुबूल  किया था. लेकिन छह बड़े जबानी ग्रुपों और 58 छोटे ज़बानी ग्रुपों वाले इस मुल्क में उर्दू तन्हाई की ज़बान बन गई है.

 

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