पाकिस्तान: 70 साल बाद इस गांव की महिलाएं दे सकेंगी वोट!

पाकिस्तान: 70 साल बाद इस गांव की महिलाएं दे सकेंगी वोट!
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पाकिस्तान के एक गांव में पुरुषों ने 1947 में महिलाएं के वोट डालने पर पाबंदी लगा दी थी. 70 साल तक वह इस पर अमल करती रहीं, लेकिन वे इस फैसले को अब और आगे ढोने के लिए तैयार नहीं हैं.
मुल्तान शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर मोहरी पुर गांव है. इस गांव में जामुन के पेड़ के नीचे जमा औरतें अब वोट डालने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहती हैं. इन महिलाओं से जब कुछ पत्रकार बात कर रहे थे तो पास ही खड़े पुरुषों को यह नागवार गुजर रहा था.

ऐसे में सवाल है कि 25 जुलाई को होने वाले चुनाव में जब महिलाएं वोट डालने निकलेंगी तो क्या गांव के पुरुष इस पर नाराज नहीं होंगे? 31 साल की नाजिया तब्बसुम कहती हैं, “वे समझते हैं कि महिलाए बेवकूफ हैं.. या फिर वे इसे अपनी इज्जत से जोड़ कर देखते हैं..”

गांव के बड़े बुजुर्गों ने दशकों पहले यह कह कर महिलाओं के वोट डालने पर रोक लगा दी थी कि अगर वे सार्वजनिक पोलिंग स्टेशन में वोट डालने जाएंगी तो उनकी इज्जत को बट्टा लगेगा. इसी तथाकथित इज्जत के लिए कई लोग अपनी बहन और बेटियों की हत्या करने से भी नहीं चूकते.

पाकिस्तान में हाल के सालों में कई महिलाओं को कभी अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने के लिए तो कभी घर से बाहर जाकर काम करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है. तबस्सुम कहती हैं, “पता नहीं उस वक्त उनकी यह इज्जत कहां चली जाती है जब वे घर पर सो रहे होते हैं और उनकी औरतें खेतों में काम कर रही होती हैं.”

इस बार पाकिस्तान में चुनाव आयोग ने नियमों में कई बदलाव किए हैं, जिससे मोहरी पुर की महिलाओं को हौसला मिला है. चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक हर निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 10 प्रतिशत वोटर महिला होनी चाहिए, वरना चुनाव परिणाण को वैध नहीं माना जाएगा. आयोग का कहना है कि इस बार पाकिस्तान में दो करोड़ नए वोटर रजिस्टर किए गए हैं जिनमें 91.3 लाख महिलाएं हैं.

नए नियमों से मोहरी पुर जैसे इलाकों में बदलाव की उम्मीद की जा रही है. सामाजिक कार्यकर्ता फरजाना बारी कहती हैं, “मुख्य कारण यह है कि इन इलाकों में महिलाओं को घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है.” बरी का मानना है कि चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों के बावजूद कुछ इलाकों में महिलाओं को वोटिंग से रोका जा सकता है.

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