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पार्टी अरकान से मायावती की मुशावरत , इंतेख़ाबी नाकामी का जायज़ा

यूपी असेंबली इंतेख़ाबात में पार्टी के इंतिहाई नाक़िस मुज़ाहिरे के बाद बहुजन समाज पार्टी की सरबराह मायावती ख़ुद एहतसाबी करने के लिए तैयार हैं। साबिक़ चीफ़ मिनिस्टर ने पार्टी क़ाइदीन का एक तीन रोज़ा इजलास तलब किया है जिसमें इंतेख़ाब

यूपी असेंबली इंतेख़ाबात में पार्टी के इंतिहाई नाक़िस मुज़ाहिरे के बाद बहुजन समाज पार्टी की सरबराह मायावती ख़ुद एहतसाबी करने के लिए तैयार हैं। साबिक़ चीफ़ मिनिस्टर ने पार्टी क़ाइदीन का एक तीन रोज़ा इजलास तलब किया है जिसमें इंतेख़ाबी नाकामी का तजज़िया किया जाएगा।

बी एस पी जारीया साल सिर्फ़ 80 नशिस्तें हासिल करने में कामयाब रही जबकि 2007 में इस ने 2003 नशिस्तें हासिल की थीं। लखनऊ में पार्टी हेड क्वार्टर्स पर तलब कर्दा इजलास में जो 3 रोज़ जारी रहेगा मायावती पार्टी के नाक़िस मुज़ाहिरे का तजज़िया करेंगी। पार्टी क़ाइदीन की ज़हन साज़ी करेंगी। और रियासत की सयासी सूरत-ए-हाल का जायज़ा लिया जाएगा।

इजलास में रियास्ती असेंबली के नौ मुंख़बा अरकान के इलावा क़ानूनसाज़ कौंसल, राज्य सभा और लोक सभा के बी एस पी अरकान शिरकत करेंगे। बी एस पी की तमाम रियास्ती शाख़ों, ज़िलई ओहदेदारों और इलाक़ाई राबिता कारों को भी क़ौमी आमिला इजलास में मदऊ किया गया है।

इस्तीफ़ा पेश करने के बाद मायावती ने शिकस्त के लिए कांग्रेस और बी जे पी इल्ज़ाम आइद किया कि उन्होंने इंतेख़ाबात को फ़िर्कावाराना रंग दे दिया था। बी एस पी के रियास्ती सदर और मायावती के क़रीबी साथी स्वामी प्रसाद मौर्या को बी एस पी मुक़न्निना पार्टी क़ाइद मुंतख़ब किया गया है।

बावसूक़ ज़राए के बमूजब इम्कान है कि मायावती राज्य सभा की नशिस्त के लिए पर्चा नामज़दगी दाख़िल करेंगी। राज्य सभा में जारीया माह के अवाख़िर में यूपी से 12 अरकान मुंतखिब किए जाऐंगे। मायावती अब क़ौमी सियासत में हिस्सा लेना चाहती हैं। ज़राए के बमूजब मायावती के क़रीबी साथी नसीम उद्दीन सिद्दीक़ी और मौर्या को रियासत यूपी का ज़िम्मेदार बनाया जाएगा।

मायावती 80 अरकान असेंबली के इंतेख़ाब के बाद 2 अरकान राज्य सभा रवाना कर सकती हैं। ज़राए के बमूजब राज्य सभा में मायावती का क़ाफ़िला तक़रीबन यक़ीनी है। वो अपने क़रीबी साथी और साबिक़ का बीनी मोतमिद शशांक शेखर सिंह के साथ राज्य सभा में दाख़िल होना चाहती हैं।

समाजवादी पार्टी की इंतेख़ाबी मुहिम की क़ियादत पार्टी सरबराह मुलायम सिंह यादव के फ़र्ज़ंद खलेश यादव ने की थी। कांग्रेस और बी जे पी ने अपनी इंतेख़ाबी मुहिम पूरी शिद्दत से चलाई थी लेकिन दोनों क़ौमी पार्टीयां नाकाम रहीं।

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