Thursday , June 21 2018

पार्लीमेंट के इजलासों(सभाओं) की तादाद में साल ब साल(हर साल) कमी

हिंदूस्तानी पार्लीमेंट अपने क़ियाम की 60 वीं सालगिरा आज मना रही है लेकिन इस के इजलासों की तादाद के आदाद-ओ-शुमार और क़ानून साज़ियों की तादाद से ज़ाहिर होता है कि जमहूरीयत का मंदिर अब वो नहीं रहा जो कभी था।

हिंदूस्तानी पार्लीमेंट अपने क़ियाम की 60 वीं सालगिरा आज मना रही है लेकिन इस के इजलासों की तादाद के आदाद-ओ-शुमार और क़ानून साज़ियों की तादाद से ज़ाहिर होता है कि जमहूरीयत का मंदिर अब वो नहीं रहा जो कभी था।

पी आर एस लीजस्लीटीव रिसर्च की तहक़ीक़ के बमूजब(मुताबिक) लोक सभा के 1950 की दहाई में औसतन(लग भग) 127 दिन और राज्य सभा के 93 दिन इजलास मुनाक़िद किए गए थे। लेकिन ये अब कम होते होते 2011 में इजलासों की तादाद कम होकर 73 रह गई है।

इस हक़ीक़त के बावजूद कि परीसाईडनग ऑफीसर्स, चीफ़ मिनिस्टर्स, वुज़रा पार्लीमेंट्री उमुर, क़ाइदीन और पार्टीयों के विहिप की कुल हिंद कान्फ़्रैंसें 2001 में मुनाक़िद की गईं और मुतालिबा किया गया था कि पार्लीमेंट के इजलास हर साल कम अज़ कम 110 होने चाहिए।

पार्लीमेंट की कार्रवाई में बार बार ख़ललअंदाज़ी(गड बड) की वजह से फ़िक्रमंदी और ख़ुद एहतिसाबी की ज़रूरत आज़ाद हिंद के पहले
पार्लीमेंट्री इजलास की 60 साला तक़ारीब(सभाओं) के मुबाहिस(बहसों) का ग़ालिब मौज़ू रहीं। ताहम(लेकीन) तहक़ीक़ के बमूजब(मुताबिक) ये बात नोट की जानी चाहीए कि महिकमा जाती ताल्लुक़ात की स्टांडींग कमेटियां 1993 में क़ायम की गई थीं और इस वक़्त से पार्लीमेंट ने इन कमेटीयों से कई मुसव्विदात क़ानून मंज़ूर किए हैं। पार्लीमेंट के इजलासों से बाहर काम होरहा है। तहक़ीक़ में ये भी निशानदेही की गई है कि पहली लोक सभा में हर साल औसतन(लग भग) 72 क़वानीन मंज़ूर किए थे लेकिन उन की तादाद
पंद्रहवीं लोक सभा में कम होकर 40 रह गई है।

एक साल में मंज़ूर किए जाने वाले क़वानीन की आज़म तरीन(जयादा से जयादा) तादाद इमरजंसी के दौर में 1976 में 118 थी
और अक़ल्ल तरीन(कम से कम) तादाद में क़वानीन 2004 में यानी सिर्फ 18 क़वानीनपार्लीमेंट की जानिब(तरफ) से मंज़ूर किए गए।

तहक़ीक़ में निशानदेही की गई है कि ताहाल(अभि तक) पार्लीमेंट ने 14 ख़ानगी अरकान(सदस्यों) के क़वानीन और 6 इन्फ़िरादी क़वानीन 1956 में मंज़ूर किए थे। मौजूदा पार्लीमेंट की लोक सभा में 264 और राज्य सभा में 160 ख़ानगी अरकान के मुसव्विदात क़ानून पेश किए गए। जिन में से लोक सभा में सिर्फ 14 और राज्य सभा में सिर्फ 11 पर तबादला-ए-ख़्याल
(सोच विचार)हुआ।

लोक सभा में बहुत कम अरकान मैट्रिक कामयाब कम और पोस्ट ग्रेज्युएट अरकान(सदस्यों) की तादाद इबतिदाई बरसों की बनिसबत ज़्यादा है।

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