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पासपोर्ट के नये नियम में सिर्फ़ साधुओं को छुट क्यों?, सभी धर्मों के धर्मगुरुओं को क्यों नहीं?- शहज़ाद पूनावाला

नई दिल्ली। कुछ ही दिनों पहले उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए नमाज़ अदा करने हेतु 90 मिनट की छुट दी थी। जिसपर मीडिया में हायतौबा मच गया था। मीडिया के अलावा कुछ राजनेताओं ने भी इस पर सवाल खड़े किए थे। विरोध को देखते हुए हरीश रावत की सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के लिए यह सुविधा देने का ऐलान किया, जिसके बाद यह मामला खत्म हुआ।

अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा पासपोर्ट में दिए गए सुविधाओं से लोगों राहत तो मिली ही है, मगर एक ऐसा फैसला जिसमें साधु- संतो के लिए खास छुट दी गई है, जो कई सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस के सीनियर नेता और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव शहजाद पुनावाला ने इस पर सवाल उठाए हैं। शहजाद पुनावाला ने कहा है कि हरीश रावत की सरकार जब 90 मिनट का नमाज़ में छुट दिया था तो इस पर देश में बहुत बड़ा बवाल मचाया गया था। जिसके बाद यह फैसला सभी धर्मों के लिए बना दिया गया,जिसको हम एक सेल्यूलर एप्रोच कहते हैं और हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन उस वक्त तस्लीम रहमानी, अमीश देवगन और कई मीडिया चैनलों इस पर काफी बवाल मचाया था जिसमें कहा था कि यह फैसला एक मुस्लिम तुष्टिकरण है।

शहज़ाद पूनावाला ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर का हवाला देते हुए कुछ सवाल खड़े किए हैं। पासपोर्ट के नये नियमों में साधुओं को राहत दी गई है। शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि हम इसका भी स्वागत करते हैं। शहजाद ने उनलोगों को आड़े हाथों लिया जो लोग उस वक्त उत्तराखंड सरकार द्वारा नमाज़ में दिये गये छुट पर तुष्टिकरण का इल्ज़ाम लगा कर बवाल मचाया था। शहज़ाद पूनावाला ने उन लोगों से पुछा कि यह क्या है? क्या यह तुष्टिकरण नहीं है? हम इसका भी स्वागत करते हैं।

हम तो यह कहना चाहते हैं कि मोदी सरकार सिर्फ़ साधुओं के लिए ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के धर्म गुरुओं के लिए आसान करें। अगर सिर्फ साधुओं के लिए यह सुविधा मिलेगी तो सवाल ये पैदा होता है कि जो लोग मुस्लिम तुष्टिकरण का आलाप लगा रहे थे, वो लोग अब कहां हैं? मेरी राय में सही सेल्यूलरिजम यही होगा, जिसमें हर धर्म के लोगों को सम्मान मिलेगा।

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