पीएम मोदी को इमरान खान का न्योता स्वीकार करना चाहिए, भारत- पाक में बातचीत की पहल होनी चाहिए- मीरवाइज उमर फारूक

पीएम मोदी को इमरान खान का न्योता स्वीकार करना चाहिए, भारत- पाक में बातचीत की पहल होनी चाहिए- मीरवाइज उमर फारूक

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को बातचीत का न्योता भेजने के बाद से ही देश में सियासत गर्मा गई है। दोनों देशों को बीच संबंधों को लेकर की गई इस पहल में अब घाटी से भी आवाज बुलंद हुई है। इस बार हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने बड़ा बयान दिया है।

मीरवाइज ने प्रधानमंत्री मोदी से पाक पीएम इमरान खान के बातचीत के न्योते पर स्वीकार करने की बात कही है। मीरवाइज ने कहा है कि पीएम मोदी को ये इमरान का ये ऑफर मान लेना चाहिए और दोनों मुल्कों के बीच बातचीत की पहल को शुरू करना चाहिए। मीरवाइज ने कहा है कि केंद्र को पाकिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया में कश्मीरियों को भी साझीदार बनाना चाहिए।

आपको बता दें कि इमरान के न्योते के बाद से ही लगातार भारत से इसको लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने करतारपुर कॉरिडोर के बहाने साफ शब्दों में कहा कि इस कॉरिडोर के जरिये पाकिस्तान गलतफहमी न पाले कि हम बतचीत के लिए तैयार हो जाएंगे। सुषमा ने कहा कि आतंकवाद और बातचीत दोनों के साथ नहीं हो सकती है।

हाल में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने पाकिस्तान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान कहता है हम एक कदम चलें तो वो चार कदम बढ़ाएगा, लेकिन हम ये कहते हैं पाकिस्तान एक कदम भी सही चलकर दिखाए निश्चित रूप से भारत अपने चार कदम बढ़ाएगा, लेकिन जब तक आतंक का हाथ थामकर पाकिस्तान चलेगा बातचीत संभव नहीं है।

बहरहाल हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस न्योते को कुबूल कर लेना चाहिए। वहीं, उन्होंने नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री के हालिया कश्मीर दौरे का भी जिक्र करते हुए कहा कि विश्व समुदाय भी कश्मीर मसले के समाधान में अपनी भूमिका निभाने के लिए अब सामने आने लगा है।

शुक्रवार को जामिया मस्जिद में जुमा की नमाज से पहले लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री जम्मू कश्मीर में वाकई शांति बहाली चाहते हैं तो उन्हें पाकिस्तान की बातचीत के न्योते को गंभीरता से लेना चाहिए। कश्मीर मुद्दे का हल बातचीत से ही निकाला जा सकता है। लिहाजा हमें बातचीत का एक मौका देना चाहिए।

साभार- ‘पत्रिका’

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