पीएम मोदी बोलें अगर सरदार साहेब ने संकल्प न लिया होता तो तो चारमीनार देखने के लिए वीजा लेना पड़ता

पीएम मोदी बोलें अगर सरदार साहेब ने संकल्प न लिया होता तो तो चारमीनार देखने के लिए वीजा लेना पड़ता
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धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के कावडिया में बनी दुनिया की सबसे ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण किया। इसके बाद पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता तो फिर आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए, हैदराबाद में चार मीनार को देखने के लिए हमें वीजा लेना पड़ता।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण के बाद पीएम मोदी ने कहा कि पूरा देश आज राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। भारत भक्ति की भावना से ही हमारी सभ्यता फल फूल रही है। आज का दिन इतिहास में कोई नहीं मिटा पाएगा। आज देश के विराट व्यक्ति को उचित स्थान मिला। पीएम ने कहा कि आज भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से संवाद कर रहा है। सरदार के संकल्प से कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक ट्रेन सेवा मिली। इसके अलावा सरदार पटेल की ही वजह से सभी रियायतें एक हुईं।

उन्होंने कहा, ‘सरदार पटेल की ये स्मारक उनके प्रति करोड़ों भारतीयों के सम्मान, हमारे सामर्थ्य, का प्रतीक तो है ही, ये देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान होने वाली है। इससे हजारों आदिवासी बहन-भाइयों को हर साल सीधा रोजगार मिलने वाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार साहब के दर्शन करने आने वाले टूरिस्ट सरदार सरोवर डैम, सतपुड़ा और विंध्य के पर्वतों के दर्शन भी कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकि सामर्थ्य का भी प्रतीक है। बीते करीब साढ़े 3 सालों में हर रोज कामगारों ने, शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है। पीएम ने संबोधन में राम सुतार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राम सुतारजी की अगुवाई में देश के अद्भुत शिल्पकारों की टीम ने कला के इस गौरवशाली स्मारक को पूरा किया है।

 

‘राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा’

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बारे में बोलते हुए पीएम ने कहा कि ये प्रतिमा, सरदार पटेल के उसी प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है। ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा। उन्होंने कहा कि कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर हम जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब के संकल्प से ही संभव हो पाया है।

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