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पीलमाइरा की जीत: बशारुल असद के लिए नई ज़िंदगी

शामी फ़ौजों की जानिब से पीलमाइरा का इलाक़ा वापिस लिए जाने बाद वहां गुज़िश्ता दस माह से जारी शिद्दत पसंद तंज़ीम दौलते इस्लामीया के क़ब्ज़े का ख़ातमा हो गया है। इस फ़तह को दौलते इस्लामीया की मुकम्मल शिकस्त नहीं कहा जा सकता क्योंकि रका, देर अलज़ोर, और मूसल में उनके महफ़ूज़ ठिकाने अब भी मौजूद हैं, लेकिन ये फ़तह जोग़राफ़ियाई और सियासी दोनों तरह से इस जंगजू तंज़ीम की ताक़त की बुनियादें हिलाने में एक अहम पेशरफ़्त है।

इस फ़तह से इस तास्सुर की भी खात्मा होता है कि इस नाम निहाद ख़िलाफ़त की मुसल्लह अफ़्वाज नाक़ाबिले शिकस्त हैं। गुज़िश्ता साल मई में तारीख़ी एहमीयत के हामिल इस शहर के सुकूत के बाद पैदा होने वाले नफ़सियाती असरात कमो बेश वही थे जो इसी माह दौलते इस्लामीया के इराक़ के शहर रमादी पर क़ब्ज़ा हासिल करने के बाद थे।

बीजी, तिकरीत, कोबानी और अल हसका में शिकस्त खाने के फ़ौरन बाद दौलते इस्लामीया इन दोनों इलाक़ों पर क़ाबिज़ होने में कामयाब हो गई थी। उसने दोनों शहरों में शामी और इराक़ी फ़ौज की पेशक़दमी से क़ब्ल ही उन पर ग़लबा हासिल कर लिया था।

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