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पी इंदिरा रेड्डी उबूरी पुल लंगर हौज़ पर तामीर कर्दा यादगार ग़ायब

हैदराबाद 25 मई : जगन मोहन रेड्डी गैर मुतनासिब असासाजात केस में शक के दायरे में रहने वाली सबीता इंदिरा रेड्डी ने सब से ओहदा वजराते दाख़िला से इस्तीफ़ा दिया है ऐसा लगता है कि तब से उन का बुरा वक़्त शुरू हो गया है।

हैदराबाद 25 मई : जगन मोहन रेड्डी गैर मुतनासिब असासाजात केस में शक के दायरे में रहने वाली सबीता इंदिरा रेड्डी ने सब से ओहदा वजराते दाख़िला से इस्तीफ़ा दिया है ऐसा लगता है कि तब से उन का बुरा वक़्त शुरू हो गया है।

साबिक़ चीफ मिनिस्टर आँजहानी डॉक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी की जानिब से सबीता इंदिरा रेड्डी को आंध्र प्रदेश की पहली ख़ातून वज़ीर दाख़िला बनाया गया था उस के बाद से वो बड़ी खामूशी के साथ अपने फ़राइज़ अंजाम दे रही थीं।

आप को बतादें को 28 फरवरी 2010 को लंगर हौज़ में 17 करोड़ रुपये की लागत से तामीर कर्दा इंदिरा रेड्डी फ़्लाई ओवर का उस वक़्त के चीफ मिनिस्टर के रोशैया ने इफ़्तिताह अंजाम दिया था।

इस मौक़ा पर इस पोल पर दाख़िल होने के मुक़ाम पर दरमियान में एक ख़ूबसूरत यादगार क़ायम की गई थी लाखों रुपये के खर्च से तामीर कर्दा इस यादगार पर तेलुगु उर्दू और अंग्रेज़ी में तख्तियां नस्ब की थीं ताहम जी एच एम सी की लापरवाही के बाइस ये यादगार तबाहो बर्बाद हो गई और तख्तियां भी टूट फूट गईं लेकिन अब पता चला कि इस यादगार का रातों रात वहां से मुकम्मल सफ़ाया कर दिया गया।

आख़िर इस यादगार को क़ायम करने के बाद उसे वहां से बेदर्दी के साथ वहां से हटाने के बारे में बल्दी ओहदेदार ही दुरुस्त जवाब दे सकते हैं। आप को बतादें कि एक जनवरी 2007 को इस उबूरी पुल का वाई एस आर ने संगे बुनियाद रखा था।

3 साल में पाए तकमील को पहुंचे उस उबूरी पुल की लंबाई 750 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है जब कि हर सिम्त दो लाइंस ( सड़कें हैं ) इस उबूरी पुल की तामीर से ट्रैफिक बहाव में आसानी भी हुई है।

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