Wednesday , December 13 2017

पुराना शहर की तरक़्क़ी के लिए 2000 करोड़ रुपये के ख़ुसूसी पैकेज का क्या हुआ?

कांग्रेस की ज़ेरे क़ियादत रियासती हुकूमत ने पुराना शहर को तरक़्क़ी देने से मुताल्लिक़ मुतअद्दिद मर्तबा सैंकड़ों वाअदे किए और फिर अपने वादों को यक्सर फ़रामोश कर दिया।

कांग्रेस की ज़ेरे क़ियादत रियासती हुकूमत ने पुराना शहर को तरक़्क़ी देने से मुताल्लिक़ मुतअद्दिद मर्तबा सैंकड़ों वाअदे किए और फिर अपने वादों को यक्सर फ़रामोश कर दिया।

दिलचस्पी और हैरत की बात ये है कि हर चीफ मिनिस्टर ने पुराना शहर का दौरा करते हुए शहर के इस पसमांदा इलाक़ा के लिए कई एक तरक़्क़ियाती प्रोग्राम्स और प्रोजेक्ट्स शुरू करने के एलानात किए और फिर इन एलानात को सिर्फ़ एलानात की हद तक ही महदूद रख दिया गया।

12 अक्टूबर 2006 को उस वक़्त के चीफ मिनिस्टर डॉक्टर वाई एस राज शेखर रेड्डी ने पुराने शहर की तरक़्क़ी के लिए 2000 करोड़ रुपये के तरक़्क़ियाती पैकेज का एलान किया था।

तारीख़ी चारमीनार के दामन में एक पुरहुजूम प्रेस कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए वाई एस आर ने पुरज़ोर अंदाज़ में कहा था कि पुराना शहर को 2000 करोड़ रूपयों के मसारिफ़ से ग़ैरमामूली तरक़्क़ी दी जाएगी। इस के लिए बाज़ाबता मुख़्तलिफ़ प्रोजेक्ट्स और उन पर आइद होने वाले मसारिफ़ भी गिन गिन कर बताए थे।

इस मौक़ा पर यही कहा गया था कि 800 करोड़ रुपये ज़ेरे ज़मीन ड्रेनेज सिस्टम पर ख़र्च किए जाएंगे। 150 करोड़ रूपयों के मसारिफ़ से नालों की तामीर और सफ़ाई का काम अंजाम दिया जाएगा। 300 करोड़ रुपये की लागत से शहर के इस हिस्सा में आबी ज़ख़ाइर की तामीर अमल में आएगी।

पानी की नई लाईन बिछाने का काम होगा। और पसमांदा बस्तियों में सफ़ाई के प्रोग्रामों पर अमल आवरी की जाएगी। उस वक़्त इस बात का भी एलान किया गया था कि 14 करोड़ रुपये के मसारिफ़ से मीर आलम टैंक के करीब पार्क तामीर किया जाएगा और इस मुक़ाम को दोनों शहरों हैदराबाद और सिकंदराबाद के मशहूर और मारूफ़ तफ़रीही मुक़ाम में तब्दील कर दिया जाएगा जब कि इमलीबन पार्क (सालार जंग पार्क) को 35 करोड़ रुपये की लागत से तरक़्क़ी दी जाएगी।

वाई एस आर ने चारमीनार के दामन से ही अवाम से ये वाअदा किया था कि रियासती हुकूमत शहर के क़दीम मुहल्ला सुल्तानशाही में स्वीमिंग पूल , कन्दीकल गेट , उप्पूगुड़ा में रेलवे पटरियों पर रोड ओवर ब्रीज फ़लकनुमा में उर्दू मॉडल स्कूल फ़ॉर गर्ल्ज़ के क़ियाम , मूसानदी को ख़ूबसूरत बनाने और चारमीनार पैदल राहरू प्रोजेक्ट्स पर तेज़ी से काम करने के एलानात भी किए थे उन का सब से अहम एलान ये था कि पुराने शहर में गरीबों के लिए 8000 मकानात की तामीर अमल में आएगी और मिस्रीगंज में वाक़े दरगाह हज़रत शाह राजू (रह) की बुलंद और बाला गुंबद को सैयाहों के लिए पुरकशिश बनाया जाएगा।

इस नदी में अब पानी की जगह गैरकानूनी तौर पर तामीर कर्दा मंदिरें ही नज़र आ रही हैं। जब कि सारी रियासत में मूसी नदी को मच्छरों की अफ़्ज़ाइश का सब से बड़ा मर्कज़ कहा जा सकता है।

अवाम ये भी सवाल कर रहे हैं कि आख़िर वो 8000 मकानात कहाँ गए। जिस की तामीर का हुकूमत ने वाअदा किया था। दूसरी जानिब मौजूदा चीफ मिनिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने भी पुराना शहर के दौरा में कई बुलंद बाँग दावे किए लेकिन राक़िमुल हुरूफ़ ने शहरियों को ये कहते सुना कि मुत्तहदा आंध्र प्रदेश के इस आख़िरी चीफ मिनिस्टर ने जितने भी वाअदे किए वो पूरे ना हुए।

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