Monday , December 11 2017

पुराना शहर के घांसी बाज़ार और मुत्तसिल (सटे हुए) इलाक़ों में बुलंद इमारतों का जंगल

दोनों शहरों हैदराबाद-ओ-सिकंदराबाद में तामीरी सरगर्मियां उरूज पर दिखाई देती हैं ख़ासकर पुराना शहर हैदराबाद में हालिया अर्सा के दौरान तामीरी सरगर्मियां ज़ोरों पर है । ऐसा लगता है कि तारीख़ी लिहाज़ से अहमियत का हामिल पुराना शहर

दोनों शहरों हैदराबाद-ओ-सिकंदराबाद में तामीरी सरगर्मियां उरूज पर दिखाई देती हैं ख़ासकर पुराना शहर हैदराबाद में हालिया अर्सा के दौरान तामीरी सरगर्मियां ज़ोरों पर है । ऐसा लगता है कि तारीख़ी लिहाज़ से अहमियत का हामिल पुराना शहर के बाअज़ इलाक़ा जात बहुत जल्द बुलंद-ओ-बाला रिहायशी इमारतों के चंगुल में तब्दील हो जाएंगे । दुनिया के मआशी इन्हितात का असर हिंदूस्तान बिलख़सूस हमारी रियासत के दार-उल-हकूमत में रिएल एस्टेट कारोबार पर भी पड़ा है ।

जब कि तेलंगाना तहरीक ने भी यहां ज़मीनों के कारोबार तामीरी सनअत को शदीद मुतास्सिर किया लेकिन हैरत की बात ये है कि मआशी इन्हितात और तेलंगाना तहरीक का पुराना शहर के रिएल एस्टेट शोबा पर कोई असर नहीं पड़ा । शहर के अंदरूनी इलाक़ा बिलख़सूस चारमीनार , गुलज़ार हौज़ और पत्थर गिट्टी , मदीना मार्किट के अतराफ़ वाकनाफ़ के इलाक़ों में तो एक तामीरी इन्क़िलाब पैदा हुआ है ।

घांसी बाज़ार , चन्दू लाल बारहदरी , ख़िलवत ,जहांनुमा , निमरा कॉलोनी , हुसैनी आलम वगैरह में रिहायशी काम्प्लेक्सों की तामीरात मुसलसल जारी हैं ।

जब कि मुग़ल पूरा , याकूत पूरा , दबीर पूरा , संतोष नगर , रेन बाज़ार, मादना पेट जैसे इलाक़ों में रिहायशी काम्प्लेक्सों की तामीर का रुजहान देखने में नहीं आया । जहां तक घांसी बाज़ार और चारमीनार-ओ-गुलज़ार हौज़ से मुत्तसिल (सटे हुए) इलाक़ों का सवाल है यहां अर्सा क़ब्ल राजिस्थान से आए माड़वाड़िवयों की तादाद बढ़ती जा रही है ।

सोने चांदी , मोतियों और कपड़ों-ओ-मलबूसात के कारोबार करने वाले ये माड़वाड़ी घांसी बाज़ार में ग़ैरमामूली बड़ी तादाद में बस गए हैं इस इलाक़ा में आप को हर मुक़ाम पर हिमामंज़िला रिहायशी इमारात नज़र आएंगी । जब कि कई ऐसे मुक़ामात भी आप देखेंगे जहां रिहायशी काम्प्लेक्सों की तामीर का काम ज़ोर-ओ-शोर से जारी है ।

चार ता 5 साल क़ब्ल माधापूर और हाईटेक सिटी में आराज़ीयात की कीमत 4500 ता 6000 रुपय फ़ी मुरब्बा (एस्क्वाएर)फीट थी लेकिन आज वो कीमतें गिर कर 3000 ता 3500 रुपय मुरब्बा फीट हो गईं । जब कि पुराना शहर के घांसी बाज़ार और इस से मुत्तसिल (सटे हुए) इलाक़ों में अराज़ी की कीमत 1800 ता 2000 से लेकर 2800 ता 3000 रुपय मुरब्बा फीट चल रही है ।

रिएल एस्टेट से वाबिस्ता अफ़राद का कहना है कि अराज़ी की मांग और कीमतों में इज़ाफ़ा कसीर तादाद में हैदराबादियों का बैरून मुलक जाना , दीगर रियासतों से ताजरीन और माहिरीन का इधर आना जैसे वजूहात के बाइस देखा जा रहा है । जहां तक घांसी बाज़ार और इस से मुत्तसिल (सटे हुए) इलाक़ों का सवाल है रिहायशी काम्प्लेक्स बनते ही सारे फ्लैट्स पुर हो जाते हैं ।

तामीर के आग़ाज़ के साथ ही तमाम फ्लैट्स की बुकिंग हो जाती है । इस मुआमला में रिएल एस्टेट कारोबार से वाबिस्ता अफ़राद काफ़ी ख़ुश हैं । घांसी बाज़ार उन के लिये सोने की कान साबित हो रही है । यहां इस बात का तज़किरा भी ज़रूरी होगा कि घांसी बाज़ार और हुसैनी अलम में काफ़ी ओक़ाफ़ी जायदादें भी हैं ।

उन्हें डेवलप करते हुए वक़्फ़ बोर्ड अपनी आमदनी के ज़राए में इज़ाफ़ा कर सकता है । दूसरी जानिब अगरचे पुराना शहर फ़िल वक़्त फ्लैट कल्चर से पूरी तरह आश्ना नहीं हुआ है लेकिन उम्मीद है कि आइन्दा 10 ता 20 बरसों के दौरान यहां के शहरी फ्लैट्स कल्चर से हम आहंग हों जाएंगे।

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