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पुलिस की दरिंदगी- ‘गोली मारकर जीप से कुचला, जिंदा देख फिर मारी गोली’

पटना 27 जून : मग्रीबी चंपारण के बगहा के नौरंगिया थाना इलाके के एक गांव में पीर को हुई पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत के बाद मकतुल लोगों से मिलने आए बिहार के साबिक़ नायब वजीर ए आला सुशील कुमार मोदी ने बुध को कहा कि पुलिस ने यहां ज्‍य

पटना 27 जून : मग्रीबी चंपारण के बगहा के नौरंगिया थाना इलाके के एक गांव में पीर को हुई पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत के बाद मकतुल लोगों से मिलने आए बिहार के साबिक़ नायब वजीर ए आला सुशील कुमार मोदी ने बुध को कहा कि पुलिस ने यहां ज्‍यादती की सारी हदे पार कर दी। उन्‍होंने कहा कि यहां पर लोगों को पहले गोली मारी गई और फिर उन्‍हें जीप से कुचल दिया गया। उन्‍होंने कहा कि ब्रह्मदेव खतई नामी को पुलिस की गोली लगी। वह खेत में छटपटा रहा था। गांव के लोगों को इसकी खबर लगी तो वे भागे-भागे वहां पहुंचे। पर पुलिस ने उसका इलाज कराने के बदले उसे जीप पर लादकर सड़क पर ले गयी। जख्मी खतई को जीप से कुचल दिया गया। बाद में उसे गोली मार दी गयी।

पुलिस फायरिंग के शिकार दरदरी गांव के मकतुल की जो आपबीती सुनाई वह हैरान करने वाली है। उन्‍होंने बताया कि वाकिया में मारे गए तुलसी राय के माथे में गोली मारी गयी। वह गुजरात में काम करता था और फिलहाल अपने गांव आया हुआ था। सातवीं क्लास में पढऩे वाले 14 साल के अनिल को भी गोली मारी गयी। अनूप चतरिया नामी एक और लड़के को छाती में गोली मारी गयी।

पुलिस की किरदार पर सवाल

भाजपा लीडर ने कहा कि मारे गए लोग मुजरिम नहीं थे। वे आम लोग थे। पुलिस ने ख्वातीन को बेरहमी से पीटा। पुलिस को भीड़ और मुजरिमों में फर्क करना चाहिए। इस वाकिया में 35 लोग जख्मी हो गए।

लापता नवजवान के लाश मिलने के बाद भीड़ पर पुलिस ने चलाई थी गोलियां

एक पखवारे पहले वाल्मीकिनगर थाने के दरदरी गांव रिहायसी रामायण काजी का बीटा चंद्रेश्वर काजी नौरंगिया थाना के देवताहा गांव रिहायसी रामचंद्र खतईत के घर भाड़े पर लाउड स्पीकर बजाने गया था। वहां उसे 16 जून तक देखा गया। इसके बाद वह गायब हो गया। काफी खोजबीन के बाद चंद्रेश्वर नहीं मिला, तो उसके वालिद ने नौरंगिया थाने में गुमशुदगी की इत्तेला दी। सनीचर को बालेश्वर महतो, रविकेश कुमार, कृष्णदेव काजी को मशकुक बताते हुए सनाह दर्ज कराई। कहा कि उसके बेटे की क़त्ल कर लाश गायब कर दिया गया है। इतवार की रात नौरंगिया पुलिस ने कुछ मुश्तबा अफराद को पकड़ लिया।

पीर के दिन कई गांवों के लोग नौरंगिया थाना पहुंचकर हिरासत में लिए गए लड़कों को गावं वाले के हवाले करने की मांग करने लगे। उन्हें समझाकर जैसे-तैसे वापस किया गया। तकरीबन दो घंटे बाद जब चंद्रेश्वर का लाश मिला तो इत्तेला देने पुलिस के अफसर उसके गांव गए। वहां पहले से मौजूद कई गांवों के लोगों ने पुलिस बल को घेरकर यार्गमाल बना लिया। उनकी मांग थी कि पकड़े गए लोगों को उनके हवाले किया जाए। डीएसपी सिन्हा समेत दीगर पुलिस अहलकारों ने जब गावं walon की गिरफ्त से निकलने की कोशिश की तो हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान कई पुलिस अहलकार जख्मी भी हो गए। इसी के बाद पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। इससे छह लोग मौके पर ही मारे गए और दीगर जख्मी हो गए।

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