Friday , December 15 2017

पुलिस वालों ने नक्सलियों को बेचे असलाह

झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर (एसटीएफ) और आर्मी की गोलियां नक्सलियों तक पहुंच रही हैं। कहीं-कहीं तो आर्मी के बुलेटप्रूफ जैकेट, हैंड ग्रेनेड और बड़े असलाह भी नक्सलियों को बेचे गए हैं। खुसुसि शाख की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर (एसटीएफ) और आर्मी की गोलियां नक्सलियों तक पहुंच रही हैं। कहीं-कहीं तो आर्मी के बुलेटप्रूफ जैकेट, हैंड ग्रेनेड और बड़े असलाह भी नक्सलियों को बेचे गए हैं। खुसुसि शाख की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नक्सलियों से मुठभेड़ की फर्जी कहानी गढ़ कर गोलियां गायब की जाती हैं। इतना ही नहीं, जवानों को तरबियत के दौरान दी जा रही गोलियां भी गायब की गई हैं। आर्मी से जुड़े साबिक़ जवान और झारखंड पुलिस के कुछ जवान नक्सलियों से मिल कर उन्हें गोला-बारूद दस्तयाब करा रहे हैं।

खुफिया महकमा ने इस पूरे मामले पर डीजीपी राजीव कुमार को रिपोर्ट देते हुए वैसे जवानों के खिलाफ कार्रवाई की शिफारिश की है। साथ ही एक टीम तशकील कर पूरे मामले की जांच कराने को कहा है। रिपोर्ट की कॉपी रियासत के कई आला अफसरों को भी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तमाम जिलों के आरक्षी सेंटरों में असलाह और गोला-बारूद का मिलान किया जाए। बड़ी तादाद में गोलियां गायब होने की तसदीक़ हो जाएगी। झारखंड पुलिस की गोली से ही नक्सली आर्मी को मार रहे हैं।

फर्जी मुठभेड़ की भी गोली गायब

झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ मुहिम के दौरान कई बार मुठभेड़ दिखा कर एफआइआर की जाती है। इसमें जवानों की तरफ से बड़ी तादाद में गोली चलाने की बात कही जाती है, जबकि सच्चाई ठीक उलट होती है। रिपोर्ट के मुताबिक 20 से ज़्यादा नक्सलियों की गिरफ्तारी में पुलिस की तरफ से कोई फायरिंग नहीं की गई थी, लेकिन अलग-अलग जिलों में मुठभेड़ से मुतल्लिक़ केस दर्ज किए गए और बड़ी तादाद में गोलियां गायब कर दी गईं।

प्रैक्टिस की गोलियां भी गायब

रियासत के 24 जिलों में जवानों को वक़्त ब वक़्त फायरिंग के लिए गोलियां दी जाती हैं। जवान कम फायरिंग कर गोलियां गायब कर देते हैं। इसकी भी तहक़ीक़ात कराने की शिफारिश रिपोर्ट में की गई है।

दो के पकड़े जाने के बाद हुआ खुलासा

रांची की चुटिया पुलिस ने 23 नवंबर को मनोज गोप और योगेंद्र उर्फ छोटू को गिरफ्तार किया था। उनके पास से ज़िंदा कारतूस बरामद किए गए थे। तमाम गोलियां झारखंड पुलिस की थीं। उनको नक्सलियों को भेजा जाना था। इस गिरफ्तारी के बाद ही खुसुसि शाख ने पूरे मामले की जांच की। जांच में यह भी पाया गया कि पुलिस की गोली-बारूद बेचने में एक रिटाइर्ड पुलिस अफसर का बेटा शामिल है। पुलिस अफसर वायरलेस महकमा से रिटाइर्ड हुए हैं।

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