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पुलिस व न्यायिक हिरासत में सबसे अधिक मौत उत्तर प्रदेश में: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शुक्रवार को अपने स्थापना दिवस पर कहा कि देश भर से आयोग को बीते साल में 1,05,664 शिकायतें मिली हैं। आकड़ों के मुताबिक यूपी में सर्वाधिक 401 मौतें न्यायिक हिरासत के दौरान हुईं हैं और 27 मौतें पुलिस हिरासत में हुई हैं। वहीं दूसरे स्थान पर पंजाब है जहां न्यायिक हिरासत में रखने की वजह से 170 मौतें होने के आंकड़े हैं।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तू जस्टिस दत्तू ने कहा कि पिछले वर्ष अक्तूबर से इस साल सितंबर तक 1757 लोगों की मौत न्यायिक हिरासत में हुई है, जबकि 192 लोगों की मौत पुलिस हिरासत में हुई। उन्होंने कहा कि देश में मानवाधिकारों की स्थिति कुल मिलाकर ठीक है। लेकिन अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। जस्टिस दत्तू ने बताया कि आयोग को मानवाधिकार हनन के बारे में हर साल एक लाख से अधिक शिकायतें मिलती हैं। इससे पता चलता है कि लोगों में अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ी है और उनका मानवाधिकार आयोग पर विश्वास बढ़ा है।

इसके अलावा आयोग ने एनकाउंटर के मामलों के जो आंकड़े पेश किए है उसमें छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 66, असम में 43 और झारखंड में 15 एनकाउंटर के मामले सामने आए हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना दिवस हर साल 12 अक्टूबर को मनाया जाता है, लेकिन इसबार आयोग के कुछ सदस्यों की गैर-मौजूदगी के कारण इसका आयोजन 21 अक्टूबर तक टाल दिया गया था।

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