Thursday , April 19 2018

पूरे बिहार से बंद समर्थकों द्वारा हंगामा करने की खबर, गोलीबारी-पथराव, सड़कें जाम

पटना : आरक्षण के विरोध में सोशल मीडिया पर की गई बंद की अपील का सबसे ज्यादा असर बिहार में दिख रहा है। पटना, आरा, मुजफ्फरपुर, शेखपुरा समेत पूरे बिहार से बंद समर्थकों द्वारा सड़क जाम और हंगामा करने की खबरें हैं। आरा के श्री टोला में बंद समर्थकों पर गोली चलाई गई है। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस को मौके से कई खाली खोखे मिले हैं। इसके साथ ही शहर के गिरजा मोड़ पर बंद समर्थकों पर पथराव हुआ है। भोजपुर जिले के 28 जगहों पर बंद समर्थकों ने सड़क पर आगजनी और हंगामा किया है।

बिहार में कहां-कहां बंद का असर?

पटना: सगुना मोड़ पर आगजनी की गई। जाम लगाया गया। फतुहा में सड़कें जाम की गईं।

आरा: वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में बंद के चलते लॉ की परीक्षा स्थगित की गई।

नालंदा: हिलसा के पास बंद समर्थकों ने ट्रेन रोकी। जिले में कई जगह सड़क जाम किया गया है। इनके अलावा मुजफ्फरपुर, बक्सर, शेखपुरा, नालंदा, कैमूर, दरभंगा, वैशाली, बेगुसराय और छपरा में बंद समर्थकों ने कई जगह आगजनी की है और सड़कों पर जाम लगा दिया है।

कई जगह धारा 144 लगाई गई
हिंसा की अशंका को देखते हुए राजस्थान के भरतपुर में धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई है। उधर, उत्तराखंड के नैनीताल भी धारा 144 लगाई गई है। धरना-प्रदर्शन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है की एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दलित संगठनों ने भारत बंद का बुलाया था। इसका असर सबसे ज्यादा 12 राज्यों में देखने को मिला था। हिंसा में 15 लोगों की मौत हुई थी। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में 2 की मौत हुईं। बता दें कि कोर्ट ने एक्ट में बदलाव करते हुए कहा था कि एससी/एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए। इस एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत मिले। पुलिस को 7 दिन में जांच करनी चाहिए। सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की रिव्यू पिटीशन पर मंगलवार को खुली अदालत में सुनवाई की। जहां कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुनवाई में बेंच ने कहा- “हमने एससी-एसटी एक्ट के किसी भी प्रावधान को कमजोर नहीं किया है। लेकिन, इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाहों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता।”

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