“वोट की रक्षा के लिए जरुरत पड़े तो हथियार भी उठाएं, रवैया नहीं सुधरा तो सड़कों पर बहेगा खून”

“वोट की रक्षा के लिए जरुरत पड़े तो हथियार भी उठाएं, रवैया नहीं सुधरा तो सड़कों पर बहेगा खून”

पटना : बिहार में राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (आरएलएसपी) के मुखिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वोट की रक्षा के लिए जरुरत पड़े तो हथियार भी उठा लेना चाहिए। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि आप अपने हथियारों के साथ ईवीएम को लूटने से बचाने की कोशिश करें. उन्होंने कहा कई जगह से खबरें आ रही हैं कि ईवीएम मशीन को अभी इधर से उधर किया जा रहा है. उन्होंने समर्थकों से कहा कि ईवीएम को बचाने के लिए हथियार भी उठाना पड़े तो उठाइए. उनके इस बयान का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा चुनाव से पहले ही एनडीए से अलग हुए थे। उन्होंने इस बार बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वोट की रक्षा के लिए जरूरत पड़े तो हथियार भी उठाना हो तो उठाइये। आज रिजल्ट लूट की जो घटना करने की कोशिश हो रही है, इसको रोकने के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठा लेना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोगों में इसको लेकर लोगों में भारी रोष है, ऐसे में राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की भावनाओं को समझे। पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्र सरकार और बीजेपी को आड़े हाथ लेते हुए धमकी दी है कि अगर इनका रवैया नहीं सुधरा तो सड़कों पर खून बहेगा।

एनडीए नेताओं पर हमला बोलते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, ‘बिहार के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री होंगे, हम उनसे कहना चाहते हैं कि ऐसा कोई काम करने का सोच भी रहे हो तो बंद करो, नहीं तो जनता में जो आक्रोश हो रहा है। अगर इन लोगों का रवैया यही जारी रहा, तो कानून नहीं संभल पाएगा। जो चारों तरफ से खबर आ रही है, लोग जो बता रहे हैं। यही रवैया इनका जारी रहा तो सड़कों पर खून बहेगा। हम सचेत करना चाहते हैं, शासन और प्रशासन में बैठे लोगों को।’

बता दें कि विपक्षी दलों के कई नेता ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं। इसको लेकर बिहार के सीएम और एनडीए में शामिल जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने ईवीएम का बचाव करते हुए कहा कि ईवीएम पर उठ रहे सभी सवाल बेबुनियाद हैं। उन्होंने आगे कहा कि ईवीएम के आने से ही चुनावों में पारदर्शिता आई हैा और जो दल हारने वाले होते हैं वो चुनाव में खामी की बात कहते है, यह कोई नई बात नहीं है

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