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पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को नोटबंदी की भूल को स्वीकार करने की दी सलाह

नयी दिल्ली : नोटबंदी की पहली वर्षगांठ से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बड़ी भूल बताया है. ब्लूमबर्गक्विंट के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मेरा बहुत मजबूती से मानना है कि नोटबंदी को लेकर राजनीतिक करने का समय अब खत्म हो चुका है.’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगे कहा, ‘इस समय प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) को शालीलना से (नोटबंदी की) भूल को स्वीकार कर लेना चाहिए और अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए सभी से समर्थन मांगना चाहिए.’

उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के फैसले ने आर्थिक संकेतकों में जाहिर प्रभाव से कहीं ज्यादा समाज के कमजोर तबके और कारोबार को नुकसान पहुंचाया है. विपक्ष ने आठ नवंबर को नोटबंदी की पहली वर्षगांठ पर ‘काला दिवस’, जबकि भाजपा ने काला धन विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है.

वहीं, नोटबंदी और वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) के जरिए अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के दावे पर मनमोहन सिंह ने कहा, ‘अगर टैक्स का आधार बढ़ाकर अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाना है तब तो इसका स्वागत होना चाहिए. लेकिन अंत में यही सबसे महत्वपूर्ण होगा कि इसे हासिल कैसे किया गया.’ उन्होंने आगे कहा, ‘जीएसटी एक विचार है जिससे टैक्स आधार बढ़ाया जा सकता है. लेकिन इसे लागू करने का तरीका पूरे अनौपचारिक क्षेत्र को पटरी से उतारने की धमकी दे रहा है.’

डॉ मनमोहन सिंह ने साफ कहा कि नोटबंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी असर हुआ है। इससे न सिर्फ आर्थिक, बल्कि सामाजिक, सांस्थानिक और प्रतिष्ठात्मक फर्क पड़ा है। उनका कहना है कि जीडीपी में गिरावट मुकसान का महज एक संकेत है। इससे नौकरियां गई हैं, गैर-कृषि क्षेत्रों वाले छोटे और मझोले कारोबार ठप हुए और लोग बेरोजगार हो गए।उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने एक शांतिप्रिय और स्थिरता वाले भारत की साख को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। मनमोहन सिंह की नजर में देश पर यह झटका खुद पर किया गया वह हमला था जो एक विचारहीन नीति को बिना सोचे समझे लागू करने का नतीजा था।

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