पोलावरम प्रोजेक्ट इंसानी जानों के लिये संगीन ख़तरा

पोलावरम प्रोजेक्ट इंसानी जानों के लिये संगीन ख़तरा
(सियासत न्यूज़ )पोलावरम प्रोजेक्ट की तामीर इंसानी तारीख का एक ऐसा अलामीया होगा जिस की तलाफ़ी मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाएगी । क्योंकि इस प्रोजेक्ट की तामीर के बाइस जहां रियासत तेलंगाना के ज़िला खम्मम के 7 मंडल्स मज़कूरा प्र

(सियासत न्यूज़ )पोलावरम प्रोजेक्ट की तामीर इंसानी तारीख का एक ऐसा अलामीया होगा जिस की तलाफ़ी मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाएगी । क्योंकि इस प्रोजेक्ट की तामीर के बाइस जहां रियासत तेलंगाना के ज़िला खम्मम के 7 मंडल्स मज़कूरा प्रोजेक्ट में ज़ेर आब आएंगे वहीं अवामी जान-ओ-माल का ऐसा नुक़्सान होगा जिसकी तलाफ़ी तवील मुद्दती बाज़ आबाद कारी प्रोग्रामों के बावजूद नामुमकिन हो जाएगी ।

हीरोशीमा-ओ-नागासाकी की तरह पोलावरम प्रोजेक्ट भी इंसानियत के लिये एक ऐसा ख़तरा है जो भोपाल गैस अलामीया की तरह इंसानियत को तारीख का एक एसा ज़ख्म दे सकता है जिस से इंसानियत को महफ़ूज़ रखना मुम्किन नहीं है । आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ पोलावरम प्रोजेक्ट के 7 मंडलों में जहां लाखों अवाम बिलख़सूस हज़ारों क़बाइली ख़ानदानों का बसेरा है वहीं हज़ारों की तादाद में हैवानात , हशरात के साथ साथ तवील तरीन जंगलाती इलाक़ा के बाइस ये उन कबायलियों की एक महफ़ूज़ आमाजगाह तस्लीम की जाती है ।

जो इंसानी ज़िंदगी के मामूलात से बेनियाज़ अपने ही क़दीम तौर-ओ-तरीका के मुताबिक़ आदिवासियों की तरह ज़िंदगी गुज़ारते हैं जब कि पोलावरम प्रोजेक्ट के बाइस क़दीम कबायली तबक़ा जो कि कोंडा रे डिल्लो के नाम से जाना जाता है । अपने इस मुक़ाम से हट जाने की सूरत में वो दीगर मुक़ाम पर बाज़ आबादकारी किए जाने पर अपनी गुज़र बसर ही नहीं कर सकेंगे बल्कि उनका क़दीम क़बीला मुकम्मल तौर पर ख़त्म हो जाने का संगीन ख़दशा लाहक़ है ।

चुनांचे पोलावरम प्रोजेक्ट के बाइस अगर उस क़बीला ( कोंडा रे डिल्लो ) की बाज़ आबादकारी का भी मंसूबा बनाया जाये तो भी ये एक एसा इंसानियत सोज़ वाक़िया होगा जिस की कम अज़ कम तारीख में दूसरी नज़ीर नहीं मिल पाएगी । इस सिलसिला में मुमताज़ जहद कार तहफ़्फ़ुज़ इंसानी हुक़ूक़ जी डी महेश कुमार ने अपना इज़हार ए ख़्याल करते हुए कहा कि पोलावरम प्रोजेक्ट की तामीर से बिलख़सूस ज़िला खम्मम के इस प्रोजेक्ट में ज़ेर ए आब आने वाले सात मंडल के घने जंगलाती इलाक़ा में ज़िंदगी बसर करने वाले कबायली तबक़ात बिलकुलिया तौर पर मादूम हो जाने का संगीन ख़तरा लाहक़ है ।

लिहाज़ा पोलावरम प्रोजेक्ट की तामीर-ओ-ज़ेर ए आब आने वाले सात मंडलों में मुक़ीम अवाम बिलख़सूस कबायली तबक़ात को होने वाले नुक़्सानात दरहक़ीक़त यूनेस्को के चार्टर की ख़िलाफ़वरज़ी के मुतरादिफ़ ( बराबर) होगा । लिहाज़ा इस मसला को यूनेस्को ( यूनाइटेड नेशन एजूकेशनल सोश्यल कल्चरल आरगनाइज़ेशन ) से रुजू करने की सूरत में यूनेस्को की मुदाख़िलत पर ना सिर्फ़ पोलावरम प्रोजेक्ट की तामीर को रोका जा सकता है बल्कि होने वाले इंसानी , हैवानात-ओ-हशरात के नुक़्सान को रोका जा सकता है ।

उन्होंने मज़ीद बताया कि चीफ मिनिस्टर रियासत तेलंगाना के चन्द्र शेखर राव के बिशमोल तेलंगाना रियासत का हर दर्द मंद दिल रखने वाले मर्कज़ी हुकूमत की जानिब से पोलावरम प्रोजेक्ट की मंज़ूरी के ख़िलाफ़ सख़्त जद्द-ओ-जहद का आग़ाज़ करना होगा और कहा कि पोलावरम प्रोजेक्ट की मंज़ूरी-ओ-तामीरात को उस वक़्त तक ना रोका जा सकेगा जब तक यूनेस्को की जानिब से पोलावरम प्रोजेक्ट के तहत आने वाले सात मंडलों में इंसानी जान-ओ-माल के तहफ़्फ़ुज़ के लिये कोई मबसूत हिक्मत-ए-अमली तैयार ना की जाये ।

और इस पर मूसिर अमल आवरी को यक़ीनी ना बनाया जाये ।

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