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प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का विकल्प सिर्फ़ राहुल गांधी हैं- कांग्रेस

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी एकजुटता को लेकर चल रहे प्रयासों के बीच कांग्रेस ने आज कहा कि वही (कांग्रेस) विपक्षी दलों की ‘‘एकता की धुरी’’ बनेगी तथा केवल राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकल्प होंगे।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ‘भाषा’ को दिये साक्षात्कार में दावा किया, ‘‘मोदीजी का विकल्प केवल और केवल राहुलजी हैं। कोई और नहीं हो सकता। कांग्रेस और देश के लोग राहुलजी को देश का अगला प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं।’’

सुरजेवाला ने यह बात इस सवाल के जवाब में कही कि अगले चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प कौन बनेगा? उन्होंने कहा, ‘‘आज दो मॉडल हैं…मोदी मॉडल (जिसमें वह) दिन में छह बार कपड़े बदलते हैं, अपने कपड़ों की क्रीज भी खराब नहीं होने देते, अपनी वेशभूषा पर जितना समय लगाते हैं शायद शासन पर उतना समय नहीं लगाते।

दूसरा मॉडल है राहुल गांधी का, जो सादगी, सरलता और साफगोई पर आधारित है। राहुल गांधी राजनीति में अपनी बेबाकी, पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए मशहूर हुए हैं। वह कठोर निर्णय लेने से भी कभी नहीं डरते।’’

विपक्षी एकता के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि बीजद, शिवसेना और अब तेतुगु देशम पार्टी धीरे-धीरे राजग से अलग हो रहे हैं जबकि ‘‘कांग्रेस विभिन्न दलों की एकता की धुरी बनती जा रही है। ‘‘यह एकता 2019 में बदलाव का आधार बनेगी।’’

बता दें कि शिवसेना पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह 2019 का चुनाव भाजपा के साथ नहीं लड़ेगी। केंद्र में सत्तारूढ़ राजग के अन्य बड़े घटक तेदेपा ने भी पिछले दिनों पेश किए गए आम बजट पर निराशा जतायी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा संसद में पेश आम बजट में मध्यम वर्ग को निराशा हाथ लगने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को केवल जुमलों से छला है, दिया कुछ नहीं। नोटबंदी और जीएसटी की सबसे बड़ी मार भी इसी वर्ग पर सबसे अधिक पड़ी।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के मुताबिक सबसे ज्यादा टैक्स भी यही वर्ग देता है। उन्हें यह लगता है कि सबसे ज्यादा अमीर यही वर्ग है जबकि सच्चाई यह है कि सबसे ज्यादा मेहनतकश और ईमानदार यही वर्ग है।

इस वर्ग को आज महंगाई की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसीलिए मध्यम वर्ग इस बात को अच्छी तरह समझ गया है कि मोदी सरकार में ‘‘बातें बहुत और काम कुछ भी नहीं।’’

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