Wednesday , June 20 2018

विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने लाओस के समकक्ष थोनगलोन सीसोलियथ से मुलाकात करते हुए क्षेत्रीय विकास के विषय पर चर्चा की जिसके दौरान बहरह दक्षिण चीन का विषय भी आभरबहत आया जहां दोनों ही नेताओं ने बहरह दक्षिण चीन पर समान रुख व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह बात बताई। आसियान। भारत शिखर सम्मेलन से अपने भाषण के दौरान मोदी ने कहा कि बहरह दक्षिण चीन विश्व व्यापार की रीढ़ है जिसके बाद समुद्र का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी बन जाती है।

उन्होंने कहा कि युनाइटेड नेशनल‌ सम्मेलन लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) के अनुसार भारत नेविगेशन पूर्ण स्वतंत्रता का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय दिया जा रहा है जब विवादित बहरह दक्षिण चीन में चीन ” अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे है जिसे क्षेत्रीय रूप से एक चुनौती माना जा रहा है जबकि फिलीपींस, वियतनाम, ताइवान, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ बहरह दक्षिण चीन में सीमाओं विवाद मौजूद है। बहरहाल नरेंद्र मोदी इस समय विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण नेताओं से बैठकों का सिलसिला जारी रखे हुए हैं और उन्होंने म्यांमार में लोकतंत्र का प्रतीक समझी जाने वाली नेता आंग सान सू ची से मुलाकात की जो फिलहाल म्यांमार में स्टेट काउंसलर के क़द्र पद पर जो विशेष रूप से उनके लिए (सोची) का गठन किया गया है जहां वह दोहरेपन सुरक्षा सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वारूप ने टोईट करते हुए आंग सान सू ची को लोकतंत्र का प्रतीक और विकास पार्टनर्स करार देते हुए उनकी जबरदस्त प्रशंसा की। उन्होंने दोनों नेताओं (मोदी और सोची) की हैंडशेक करते हुए तस्वीरें भी टोईट है।

सोची ने म्यांमार में और सुलह प्रक्रिया के बारे में भी मोदी से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने म्यांमार की पारंपरिक पोशाक पहन‌ रखा था जहां हमेशा की तरह अपनी ज़ुल्फ़ों में उन्होंने छोटे फूल भी सजा रखे थे। पिछले महीने म्यांमार ने भारत से वादा किया था कि वह किसी भी विद्रोही समूह को भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपने क्षेत्र का उपयोग करने नहीं देगा। सोची के बाद नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री चीन ली कीगयानग बुलाया। इस अवसर पर भी विकास सरूप ने बेहतरीन ट्वीट किया। यहां इस बात का उल्लेख भी दिलचस्प होगा कि मोदी और कीगयानग आंतरिक चार दिन यह दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेताओं हांगकांग ऋण में G-20 शिखर बैठक में एक दूसरे से मुलाकात कर चुके थे जहां श्री कीगयानग ने मोदी से कहा था कि दोनों देशों को अपने अपने सामरिक हितों से संबंधित संवेदनशील होना चाहिए।

नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति पार्क गेविन उच्च से भी मुलाकात की। मोदी ने जब पिछले साल दक्षिण कोरिया का दौरा किया था तब से ही भारत। दक्षिण कोरिया संबंधों को काफी महत्व दिया जा रहा है। मोदी ने उस समय राष्ट्रपति पार्क। गेविन उच्च को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया था और अपने दक्षिण कोरियाई दौरे को यादगार करार दिया था। याद रहीकह इस समय नरेंद्र मोदी खुद भारत में कई आलोचनाओं का सामना जहां सबसे बड़ी समस्या कश्मीर के रूप में उभर कर सामने आया है। विपक्ष इस बात पर उन्हें आलोचना का निशाना बना रही हैकि घरेलू मुद्दों पर ध्यान न देते हुए मोदी जी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों कैसे सुलझा सकते हैं जबकि इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन में मोदी की भागीदारी के संबंध में अब तक कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आई है।

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