Thursday , December 14 2017

प्रधानमंत्री मोदी ने GST में बदलाव के दिये संकेत

नयी दिल्ली : दिल्ली के विज्ञान भवन में लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने जीएसटी में संशोधन के संकेत दिये. उन्होंने कहा, जीएसटी में जो भी बदलाव और सुधार करना होगा, सरकार करेगी.

जीएसटी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वे लकीर के फकीर नहीं है, और जीएसटी परिषद से इस सुधार को लागू करने से जुडी तकनीकी बाधाओं को पहचानने को कहा है ताकि छोटे और मध्यम कारोबारियों की समस्याएं दूर की जा सकें. सरकार छोटे कारोबारियों की मदद करने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि ये बात सही है कि पिछले तीन वर्षों में 7.5 % की औसत वृद्धि दर हासिल करने के बाद इस वर्ष अप्रैल-जून की तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई. लेकिन ये बात भी उतनी ही सही है कि सरकार इस ट्रेंड को बदलने (रिवर्स) करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा, मेरे जैसे अर्थशास्त्र के कम जानकार को यह समझ नहीं आता है कि इतने बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के होते हुए ऐसा कैसे हो गया.

मोदी ने कहा कि देश में विभिन्न मानकों पर बेहतर विकास हो रहा है. तब भी ऐसे कुछ लोग हैं जिन्होंने अपनी आंखों पर पर्दा डाल लिया है. ऐसे में दीवार पर लिखी चीजे भी उन्हें दिखाई नहीं देती हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार नीतियां और योजनाएं इस बात को ध्यान में रखकर बना रही है कि मध्यम वर्ग पर बोझ कम हो और निम्न मध्यम वर्ग और गरीबों का सशक्तिकरण हो.

इस दौरान पीएम मोदी ने अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा पर भी बिना नाम लिए जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की निराशा फैलाने की आदत होती है. निराशा फैलाने वालों की पहचान करना बेहद जरूरी है. ऐसे लोगों को निराशा फैलाकर अच्छी नींद आती है. उन्होंने कहा, कौरवों और पांडवों को एक ही शिक्षा मिली लेकिन दोनों के विचारों में अंतर था.

प्रधानमंत्री ने सवाल किया, देश में क्या पहली बार हुआ है जब जीडीपी की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत हुई है. पिछली सरकार में 6 वर्षो में 8 बार ऐसे मौके आए जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी. उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसे भी मौके देखे हैं जब विकास दर 0.1 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत तक गिरी थी. ऐसी गिरावट देश की अर्थव्यवस्था के लिये ज्याद खतरनाक होती है. क्योंकि इस दौरान देश उच्च मुद्रा स्फीति, उच्च चालू खाते का घाटा और उच्च राजकोषीय घाटे से जूझ रहा था.

2014 से पहले के दो वर्षो में विकास दर औसतन 6 प्रतिशत के आसपास रही. यह मानते हुए कि पिछली तिमाही में जीडीपी की विकास दर में कमी आई है, प्रधानमंत्री ने कहा कि वे देश की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये समय और संसाधनों का समुचित उपयोग कर रही है और हम पिछली तिमाही में गिरावट के क्रम को बदलने को प्रतिबद्य हैं.

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