Thursday , December 14 2017

प्रशांत भूषण के तब्सिरे से केजरीवाल सहमत नही

आम आदमी पार्टी ने अपने सीनीयर लीडर प्रशांत भूषण के इस नजरिये से दूरी बनाई है कि वादी में सेक्युरिटी फोर्स खतरों से निपटने के लिए फौज की तैनाती पर फैसले के लिए कश्मीर में रायशुमारी (Polls Archive) कराया जाना चाहिए। वज़ीर ए आला अरविंद केजरीवा

आम आदमी पार्टी ने अपने सीनीयर लीडर प्रशांत भूषण के इस नजरिये से दूरी बनाई है कि वादी में सेक्युरिटी फोर्स खतरों से निपटने के लिए फौज की तैनाती पर फैसले के लिए कश्मीर में रायशुमारी (Polls Archive) कराया जाना चाहिए। वज़ीर ए आला अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अंदुरूनी सेक्युरिटी फोर्स पर फैसले कानून निज़ाम के हालात की बुनियाद पर किए जाते हैं और कश्मीर में फौज की तैनाती पर रायशुमारी नहीं हो सकती।

इतवार के रोज़ भूषण के तब्सिरे के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि मुल्क के अंदर फौज की तैनाती का फैसला Internal security के खतरे की बुनियाद पर किया जाता है। इस पर रायशुमारी कराने का कोई सवाल नहीं है ,लेकिन हमारा मानना है कि मुकामी लोगों के जज़्बातों का एहतेराम किया जाना चाहिए। वरना जम्हूरियत खतरे में होगा। उन्होंने कहा कि आप इन मुद्दों पर रायशुमारी की ताईद नहीं करती।
भूषण ने कहा था कि वादी में Internal security खतरों से निपटने के लिए फौज की तैनाती पर फैसला करने के लिए कश्मीर में रायशुमारी होनी चाहिए। उन्होंने साथ ही जम्मू-कश्मीर में फौजी ताकत इस्तेहकाम एक्ट हटाने की ताइद करते हुए कहा था कि इससे फौज को इंसानी हुकूक की खिलाफवर्जी करने की छूट मिलती है।

भूषण ने एक टीवी चैनल से कहा था कि आवाम का दिलो-दिमाग जीतना हमारे लिए बहुत अहम है। इसके लिए, पहली चीज है कि अफ्स्पा हटाया जाए जो फौज को इंसानी हुकूक की खिलाफवर्जी की छूट देता है। उन्होंने कहा था कि अक्लीयतों के हुकूक की हिफाज़त को छोडकर इंटर्नल सेक्युरिटी के मकसदों के लिए फौज की तैनाती सिर्फ आवाम की रजामंदी के साथ ही असरदार होगी। साल 2011 में भूषण ने जम्मू-कश्मीर में राशुमारी कराने के ख्याल की ताईद करके बवाल खडा कर दिया था।

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