Thursday , December 14 2017

प्राइमरी स्कूल गोलकुंडा की अफ़सोसनाक सूरत-ए-हाल, मासूम तालिब-ए-इल्म पेड़ के नीचे तालीम हासिल करने पर मजबूर

नुमाइंदा ख़ुसूसी- बचपन में स्कूल की किताबों में देखा और पढ़ा था कि किसी गावं में एक पेड़ के नीचे एक मास्टर साहब बोसीदा(टुटी फुटी) सी कुर्सी पर बैठे हैं । उन के सामने चंद बच्चे बोरियों पर बैठे हैं । पेड़ के तने पर एक पुराना सा ब्लैक ब

नुमाइंदा ख़ुसूसी- बचपन में स्कूल की किताबों में देखा और पढ़ा था कि किसी गावं में एक पेड़ के नीचे एक मास्टर साहब बोसीदा(टुटी फुटी) सी कुर्सी पर बैठे हैं । उन के सामने चंद बच्चे बोरियों पर बैठे हैं । पेड़ के तने पर एक पुराना सा ब्लैक बोर्ड लटका हुआ है । मास्टर साहब इन बच्चों को पढ़ा रहे हैं , आप भी सोच रहे होंगे कि ये ज़माना रफ़्ता की बात थी । अब तो तरक़्क़ी याफ़ता ज़माना है । टैक्नालोजी के इन्क़िलाब ने 21 वीं सदी(सनचुरी) को एक नए दौर में लाकर खड़ा कर दिया है । अब तालीम के जदीद तरीन ज़राए बरते जा रहे हैं । जिन से अक़ल भी हैरान रह जाती है । अब तो एसा तसव्वुर तालीम गावं में भी नहीं है ।

वहां भी पुख़्ता इमारतों वाले स्कूल क़ायम होगए हैं , लेकिन क़ारईन ! आप भी हमारे साथ ताज्जुब बन जाएं कि आज भी वो गुज़श्ता की तस्वीर , गुज़री हुई बातें और यादें , क़दीम ज़माने की तालीम गाह की मुकम्मल झलक बल्कि इस से भी बढ़ कर शहर और हमारे साइबर शहर हैदराबाद में मौजूद है । जिसे टेक्नालोजी के एतबार से हिंदूस्तान के मुमताज़ शहरों में शुमार किया जाता है । जी हाँ क़िला गोलकुंडा के 400 फुट की बुलंदी पर वाक़ै शहि नशीन के बिलकुल रूबरू गर्वनमैंट प्राइमरी स्कूल क़िला गोलकुंडा के नाम से एक सरकारी स्कूल है । ये इंतिहाई क़दीम(पुराना) स्कूल है यहां ना कोई छत है ना तलबा के लिये बेनचेस हैं ना चटाई है । ना तालीम का कोई ढंग का निज़ाम(सिसटम) है ना तरतीब है । एक पेड़ के नीचे तालीम होती है ।

एक टूटे हुए ब्लैक बोर्ड के सहारे बच्चों को पढ़ाया जाता है । ग़रज़ ये कि जितनी चीज़ें नहीं होनी चाहीए वो तमाम हैं और जो होनी चाहीए वो तमाम मफ़क़ूद(नहीं) हैं और ये स्कूल पहली से पांचवीं जमात तक है जिस में जुमला 78 बच्चे हैं और उन के लिये सिर्फ़ 2 असातिज़ा (टीचर) हैं । आप अंदाज़ा लगाएं कि एसे स्कूल से किया तवक़्क़ो रखी जा सकती है । उसे स्कूल में तालीम पाकर यह वक़्त गुज़ार कर बच्चों का मुस्तक़बिल कैसा होगा । इस तसव्वुर से जिस्म के रोंगटे खड़े हो जाते हैं । मज़कूरा स्कूल के मुआइना के दौरान बच्चों के सरपरस्तों(गार्जियन) में ग़ैज़-ओ-ग़ज़ब का जो आलिम हम ने देखा वो बयान से बाहर है ।

तक़रीबन सरपरस्त(गार्जियन ) हज़रात और उन के साथ स्कूल के असातिज़ा (टीचर) भी सरकार की ग़फ़लत , बे तवज्जही बल्कि इस रवैय्या पर इंतिहाई ग़ुस्सा के आलम में थे वो ऐसी कैफ़ियत थी जिसे क़लमबंद नहीं किया जा सकता , सरपरस्तों ने कहा कि हम गरीब हैं जिस की वजह से हम ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में दाख़िला दिलाया है क्यों कि ख़ानगी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाना हमारे बस से बाहर है । हमारी थोड़ी कमाई वहां की भारी फीस को बर्दाश्त नहीं कर सकती । इस मजबूरी से हम ने बच्चों को इस स्कूल में दाख़िल करवाया है लेकिन यहां आप देख रहे हैं कि इन की पढ़ाई के कैसे इंतिज़ामात हैं ।

मज़ीद उन्हों ने कहा कि अगर हम अपनी गरीबी मआशी बदहाली , मजबूरी या किसी बीमारी वगैरह की वजह से अपने बच्चों को काम पर लगाएं ताकि वो हमारा सहारा बने , उस की वजह से हमें दो वक़्त का खाना मिले तो हुकूमत उसे भी बर्दाश्त नहीं करती । बच्चों से काम लेने पर सख़्त पाबंदी लगा रखी है । अगर किसी के पास कोई बच्चा काम करता हुआ पाया गया तो उसे 5 साल की जेल और 2 हज़ार रुपये जुर्माना अदा करना पड़ता है । एक तरफ़ तो हुकूमत बच्चा मज़दूरी पर उसे सख़्त क़वानीन बनाती है दूसरी तरफ़ उन की तालीम के लिये एसा नाक़िस बंद-ओ-बस्त (खराब इनतेजाम)किया जाता है जिस से बच्चों के मुस्तक़बिल को ख़तरा है ।

तो हम करें तो करें क्या । स्कूल के जुमला 2 उस्ताज़ों ने भी अपने ग़ुस्सा का इज़हार करते हुए बताया कि सिर्फ हम दो उस्ताज़ बच्चों को तमाम मज़ामीन पढ़ाते हैं । क़ारईन ! एक तरफ़ तो सरकारी स्कूलों का ये हाल है , दूसरी तरफ़ वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) आंधरा प्रदेश जनाब किरण कुमार रेड्डी एक सरकारी स्कूल की एक तक़रीब में ये ऐलान करते हैं कि रियासत में 1065 नए स्कूलस का क़ियाम होगा और मयारी तालीम के लिये इक़दामात किए जाएंगे । चीफ मिनिस्टर ने तक़रीब में कहा था कि रियासती हुकूमत की जानिब से सरकारी स्कूलस में मयारी तालीम की फ़राहमी और इनफ़रास्ट्रक्चर के क़ियाम के लिये कई इक़दामात किए जा रहे हैं । वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) ने कहा था कि रियासत में 1065 नए स्कूलस क़ायम किए जा रहे हैं और हर स्कूल के लिये 35 लाख रुपये ख़र्च किए जाएंगे ।

इस के इलावा 355 मॉडल स्कूलस क़ायम करने का भी मंसूबा है । हर स्कूल के लिये 3 करोड़ रुपये का तख़मीना लगाया गया है अपनी तक़रीर के दौरान वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) ने तलबा-ए-पर ज़ोर दिया था कि वो असरी तालीम और मालूमात के असरी ज़राए कंप्यूटर , इंटरनेट वगैरह से वाक़फ़ियत हासिल करें । क़ारईन ! एक तरफ़ तो वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) के उसे ख़ुशनुमा ऐलानात हैं और उसे रहनुमायाना मश्वरे कि तलबा-ए-को कंप्यूटर , इंटरनेट और दीगर असरी ज़राए इलम से वाक़फ़ियत हासिल करें । दूसरी तरफ़ सरकारी स्कूलों का क्या हाल है इस की एक झलक हम ने आप को ऊपर की स्तरों में दिखाने की कोशिश की है ।

तारीख़ी इमारत क़िला गोलकुंडा के बिलकुल मुत्तसिल(मिला हुवा) अपनी बदहाली को बयान करता हुआ ये क़दीम स्कूल वज़ीर आला के ऐलानात की क़ुव्वत को बताता है । वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) सरकारी स्कूलों के हवाले से कितने संजीदा हैं इस स्कूल से ख़ूब वाज़ेह होता है और क़ारईन क़िला गोलकुंडा को मुल्क -ओ-बैरून मुल्क से रोज़ाना सैंकड़ों की तादाद में देखने आते हैं । अगर कोई स्याह ग़लती से इस स्कूल में दाख़िल हो गया और इस ने यहां की तस्वीर देख ली तो हमारे मुल़्क की तालीम के हवाले से वो क्या तसव्वुर लेकर जाएगा । दरअसल मौजूदा हुकूमत गरीबों और अक़ल्लीयतों के हवाले से बिलकुल गैर संजीदा है सिर्फ बड़े बड़े ऐलानात हुकूमत की जानिब से किए जाते हैं । एक को भी अमली जामा सही अंदाज़ से नहीं पहनाया जाता गोया कि वज़ीर आला(चीफ मिनिस्टर ) का मज़कूरा बाला बयान गरीबों के साथ एक मज़ाक़ है ।।

TOPPOPULARRECENT