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प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मुसलमानों को बनाया जा रहा है निशाना : डॉ अस्मा ज़हरा

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य डॉ अस्मा ज़हरा ने बशीरबाग प्रेस क्लब में प्रेस से बात करते हुए कहा कि इन दिनों मीडिया में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है| विवाह, तलाक, बहुविवाह, बच्चों जैसे मुद्दों पर मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बड़ी तादाद में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज़रिये मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा है |

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उन्होंने दावा किया कि 97 प्रतिशत मुस्लिम विवाह कामयाब होते हैं और मुस्लिम पर्सनल लॉ की वजह से मुस्लिम महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं| इसमें पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं| तलाक वैवाहिक जीवन में उतार चढ़ाव की वजह हो सकता है | अगर पुरुषों तलाक देने का अधिकार दिया गया है तो महिलाओं को तलाक(खुला ) लेने का भी अधिकार दिया गया है |उन्होंने कहा कि कोई भी आदमी या औरत तलाक दे या तलाक ले उसके पीछे कुछ वजह होती हैं |

डॉ ज़हरा ने आगे कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को भारतीय संविधान के 1986 अधिनियम के तहत महफूज़ रखा गया है |इसमें विवाह के लिए सेक्शन 1939 है। इस कानून में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं है। मुस्लिम महिलाएं इस अधिनियम के माध्यम से सुरक्षित हैं।सेक्शन में भी 1986 मुस्लिम महिलाओं को तलाक और रखरखाव की तलाश करने का अधिकार दिया जाता है।मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम पर्सनल लॉ में संशोधन करने और यूनिवफार्म सिविल कोड लागू करने के ख़िलाफ़ हैं | इसमें संशोधन करने की कोई ज़रूरत नहीं है |

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