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प्रोफ़ेसर मुग़नी तबस्सुम का इंतेक़ाल

` ये ख़बर इलमी

` ये ख़बर इलमी और अदबी हलक़ों में गहरे दुख के साथ पढ़ी जाएगी कि नामवर नक़्क़ाद, शायर और मुदीर शेअरहिक्मत प्रोफ़ेसर मुग़नी तबस्सुम का इंतिक़ाल होगया।इन की उम्र1साल थी वो उस्मानिया यूनीवर्सिटी के साबिक़ सदर शोबा उर्दू के ओहदा से रिटायर हुए थे, उन्हें उर्दू एकेडेमी आंधरा प्रदेश के ऐवार्ड के इलावा ग़ालिब ऐवार्ड, आलमी फ़रोग़ उर्दू ऐवार्ड हासिल हुए थे। वो ज्ञान पैथ ऐवार्ड याफ़ता शायर शहरयार के साथ सहि माही उर्दू अदबी रिसाला शेअरहिक्मत के मुदीर थे।

मुग़नी तबस्सुम साहब के पसमानदगान में दो लड़के और तीन लड़कीयां शामिल हैं। इन की पहली और दूसरी दोनों अहलिया इंतिक़ाल करचुकी थीं। वो इदारा अदबीयात के डायरैक्टर और माहनामा सब रस के ऐडीटर भी रहे। हिंदूस्तान पाकिस्तान और उर्दू की तमाम नई बस्तीयों में मुग़नी साहिब बेहद एहतिराम से देखे जाते थे और उन के पी एचडी के मक़ाला फ़ानी। शख़्सियत और फ़न को तहक़ीक़ी मक़ाला का एक बेमिसाल नमूना समझा जाता था।

चंद बरस पहले उन की ख़िदमात का बड़े पैमाने पर एतराफ़ किया गया और इस मौक़ा पर एतराफ़ ख़िदमात का ज़ख़ीम जरीदा भी शाय किया गया था, वो कई माह से अलील थे। तीन चार दिन क़बल तबीयत ज़्यादा बिगड़ने से उन्हें शरीक दवाख़ाना किया गया था और आज:30 बजे वो इंतिक़ाल करगए। नमाज़ जनाज़ा 16फ़बरोरी को बाद नमाज़ ज़ुहर मस्जिद क़ुतुब शाही ख़ैरीयत आबाद में अदा की जाएगी और तदफ़ीन मुत्तसिल क़ब्रिस्तान में अमल में आएगी। मरहूम, डाक्टर औसाफ़ सईद हिंदूस्तानी सफ़ीर मुतय्यना यमन के मामूं थे।मज़ीद तफ़सीलात केलिए 040-23392786 पर रब्त किया जा सकता है।

 

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां का इज़हार ताज़ियत

प्रोफ़ेसर मुग़नी तबस्सुम के इंतिक़ाल से हैदराबाद की अदबी दुनिया एक ऐसे अदीबशायर से महरूम होगई जिन्हों ने उर्दू की ख़िदमत के लिए अपनी ज़िंदगी वक़्फ़ करदी थी और तादमहयात उर्दू के दरख़शां मुस्तक़बिल के मुताअल्लिक़ मुतफ़क्किर रहे। जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ऐडीटर रोज़नामा सियासत ने आज प्रोफ़ेसर मुग़नी तबस्सुम के इंतिक़ाल की इत्तिला पर अपने गहरे रंज का इज़हार करते हुए इन ख़्यालात का इज़हार किया।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां जो बग़रज़ उमरा सऊदी अरब में हैं ने प्रोफ़ेसर मुग़नी तबस्सुम के इंतिक़ाल की इत्तिला पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा किमुग़नी तबस्सुम के हज़ारों शागिर्द आज अदबी दुनिया में अपनी ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं।मुग़नी तबस्सुम ने अरसादराज़ तक इदारा अदबीयात उर्दू के मोतमद उमूमी की हैसियत से गिरां क़दर ख़िदमात अंजाम देते हुए तहज़ीबी विरसे के तहफ़्फ़ुज़ और उर्दू केफ़रोग़ केलिए जो काम किया है वो नाक़ाबिलफ़रामोश है।

उन्हों ने मरहूम के अफ़राद ख़ानदान से इज़हार ताज़ियत करते हुए कहा कि अल्लाह तआला उन्हें सब्र जमील अता फ़रमाए। जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि मुग़नी तबस्सुम के इंतिक़ाल से अदबी दुनिया में जो ख़ला पैदा हुआ है उसे पुर करना काफ़ी मुश्किल है।

 

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