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प्रोफेसर के रूप में संदीप पांडे को हटाने इलाहाबाद हाइकोर्ट में आई आई टी बनारस का हुक्म

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आईआईटी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विजिटिंग संकाय सदस्य के रूप में मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त कर देने के आदेश पर रोक लगा दी है और कहा कि देशद्रोही गतिविधियों जैसे आरोपों पर एकतरफा कार्य‌वाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के ख़िलाफ‌ है।

न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी शामिल डिवीज़न बेंच ने कल पांडे की पेशकश की एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। जिसमें उन्होंने उनके कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त कर देने से संबंधित 6 जनवरी को जारी एक आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत डिपार्टमैंट आफ़ कमीकल टैक्नोलोजी में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल इस साल 30 जुलाई को समाप्त होने वाली थी।

इस आदेश पर आपत्ति करते हुए संदीप पांडे जो गांधीवादी कार्यकर्ता भी हैं बताया कि मंडल राज्यपाल आईआईटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक उनका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर देने का फैसला किया गया और उन्हें साइबर अपराध और देशद्रोही गतिविधियों में भागीदारी का दोषी करार दिया गया।

मंडल गवर्नर्स ने पोलटिकल विज्ञान के एक छात्र के एक पत्र पर यह कार्य‌वाई की है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि श्री पांडे न केवल राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं बल्कि नक्सलवादियों पक्के समर्थक भी हैं जिस पर अदालत ने कहा कि आवेदन गुज़ार के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनके परिभाषित तलबी के बिना एकतरफा फैसले को अदालत स्वीकार नहीं कर सकती।

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