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प बंगाल के राज्य मंत्री मौलाना सिद्दिकुल्ला चौधरी तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया असंवैधानिक

कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बुधवार को पश्चिम बंगाल जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद की एक बैठक हुई. बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पश्चिम बंगाल के सर्वशिक्षा व ग्रंथागार राज्य मंत्री मौलाना सिद्दिकुल्ला चौधरी ने कहा कि 1937 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने शरीयत कानून को मान्यता दी थी. इसके बाद 1950 में भारतीय संविधान की तैयारी के समय एक बार फिर तीन तलाक को मान्यता दी गयी. अब 83 वर्ष के बाद यह असंवैधानिक हो गया. तीन तलाक का कानून 1400 वर्ष पुराना है. तीन तलाक था, तीन तलाक है और तीन तलाक रहेगा.

तीन तलाक के मुद्दे पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए इसे ‘असंवैधानिक’ बताया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी भी संसद या अदालत को शरीयत को बदलने या तलाक के मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है. अगर ऐसा करना है, तो पहले भारतीय संविधान से मौलिक अधिकार को खत्म किया जाये, तभी यह संभव हो पायेगा. राज्य में जमीयत आगामी 28 अगस्त को एक सम्मेलन का आयोजन करेगा, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्च की जायेगी. मुसलिम पर्सन लॉ में सुप्रीम कोर्ट अथवा केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, वह असंवैधानिक है, उसे हम नहीं मानेंगे.

वैसे उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि तीन तलाक कानून का गलत इस्तेमाल हुआ है. सर्वशिक्षा व ग्रंथागार राज्य मंत्री ने कहा कि कोई महिला अगर इस कानून के गलत व्यवहार से पीड़ित हैं, तो हम उनके साथ हैं. कानून का गलत इस्तेमाल बंद होना चाहिए. इसके लिए माहौल तैयार करना होगा. अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि जजों ने कोई कानून नहीं बनाया है, बल्कि उन्होंने इस पर अपनी राय दी है.

अंत में उन्होंने कहा कि उनके इस बयान से तृणमूल कांग्रेस या पश्चिम बंगाल सरकार का कोई लेना-देना नहीं है. वह जमीयत के प्रदेश अध्यक्ष हैं और उसी नाते यह बयान दे रहे हैं.

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