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फंड्स ख़र्च ना करने पर वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर पर तन्क़ीद

हुकूमत के इस इद्दिआ को कि फंड्स का कम इस्तेमाल सयासी तहदीदात की बिना पर है, पारलीमानी कमेटी ने आज 560 करोड़ रुपये मुख़्तलिफ़ फ़लाही-ओ-तरक़्क़ीयाती स्कीमों बराए अक़ल्लीयतों के कम ख़र्च पर अपनी मायूसी ज़ाहिर की। स्टैंडिंग कमेटी के सरबराह

हुकूमत के इस इद्दिआ को कि फंड्स का कम इस्तेमाल सयासी तहदीदात की बिना पर है, पारलीमानी कमेटी ने आज 560 करोड़ रुपये मुख़्तलिफ़ फ़लाही-ओ-तरक़्क़ीयाती स्कीमों बराए अक़ल्लीयतों के कम ख़र्च पर अपनी मायूसी ज़ाहिर की। स्टैंडिंग कमेटी के सरबराह बी जे पी रुकन पार्लीमेंट दारा सिंह चौहान हैं, जिस ने अपनी 26 वीं रिपोर्ट बराए वज़ारत अक़ल्लीयती उमूर लोक सभा में पेश करते हुए कहा कि वो वज़ारत की कम अख़राजात की वज़ाहत से मुतमईन नहीं है।

4 रियास्तों में इंतेख़ाबात के ऐलान और ज़ाब्ता अख़लाक़ पर अमल आवरी की वजह से उन रियास्तों में फंड्स के कम ख़र्च का वज़ारत ने इद्दिआ किया था। कमेटी ने कहा कि ज़ाब्ता अख़लाक़ बराए इंतेख़ाबात सिर्फ नई स्कीमों की राह में रुकावट बनता है। इस से जारी स्कीमों मुतास्सिर नहीं होती। कमेटी ने कहा कि बजट में जुमला 2866 करोड़ रुपये माली साल 2011 12 के लिए मुख़तस किए गए थे, लेकिन वज़ारत ने सिर्फ 2306.76 करोड़ रुपये ख़र्च किए। चुनांचे 559.24 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं हुए।

फंड्स के कम ख़र्च के रुजहान पर शदीद तशवीश ज़ाहिर करते हुए कमेटी ने वज़ारत से कहा कि मुख़्तलिफ़ स्कीमों के नफ़ाज़ का तजज़िया पेश किया जाए ताकि मुख़तस फंड्स के मोअस्सर इस्तेमाल की वज़ाहत हो सके। कमेटी ने ये भी कहा कि उसे गहरी तशवीश है कि अक़ल्लीयती ख़वातीन की क़ियादत की तरक़्क़ी के लिए स्कीम सब से पहले 2009 10 में पेश की गई थी, लेकिन अब तक इस पर अमल आवरी नहीं की गई।

कमेटी ने हैरत ज़ाहिर की कि क़ौमी अक़ल्लीयती तरक़्क़ीयाती कारपोरेशन एन एम डी एफ सी कैसे कह सकता है कि बिलकुल दरुस्त मालूमात की अदमे मौजूदगी की वजह से अवाम की 38 फ़ीसद तादाद के बारे में तख्मीना नहीं किया जा सका जबकि ख़त ग़ुर्बत की सतह से नीचे अवाम की तादाद इस से दुगुनी से भी ज़्यादा हो चुकी है। अक़ल्लीयतों के लिए ख़ुद रोज़गार स्कीम के लिए मुख़तस रियायती फ़ीनानस फ़राहम किया गया था।

कमेटी ने सिफ़ारिश की कि वज़ारत को मंसूबा बंदी कमीशन की तरह क़ौमी नमूना सर्वे तंज़ीम से सर्वे करवाना चाहीए ताकि ख़ुद रोज़गार बराए अक़ल्लीयतों के लिए रियायती फायनेंस फ़राहम किया जा सके और दुरुस्त इस्तेफ़ादा कुनुन्दगान की तादाद और उनको हासिल होने वाले फ़वाइद का बिलकुल दुरुस्त तख्मीना किया जा सके।

कमेटी ने हैरत ज़ाहिर की कि इन एम डी एफ सी ने अब तक मौजूदा ख़त ग़ुर्बत के बारे में मालूमात मंसूबा बंदी कमीशन को फ़राहम नहीं की हैं क्योंकि आमदनी ही रियायती क़र्ज़ अक़ल्लीयती ग्रुप्स को फ़राहम करने की बुनियाद है। कमेटी ने तशवीश ज़ाहिर की कि रियास्ती वसाएल के इदारों और इन्फ़िरादी इस्तेफ़ादा कुनुन्दगान को एन एम डी एफ सी ने जो क़र्ज़ फ़राहम किए थे उन की वसूली क़ाबिल इतमीनान नहीं है।

कमेटी ने वज़ारत से ख़ाहिश की कि 64.48 फ़ीसद कम ख़र्च के मसला पर रियास्तों में कसीर तबक़ाती तरक़्क़ीयाती मंसूबा से तबादला-ए-ख़्याल किया जाए, जो आला तरीन सतह पर होना चाहीए। हुकूमतों को रक़म के बरवक़्त इस्तेमाल की हिदायत देनी चाहीए।

तजावीज़ बरवक़्त पेश ना करना भी एक वजह है। मेरिट और वसाएल पर मबनी स्कालरशिप स्कीम की कारकर्दगी के मुज़ाहरा पर कमेटी ने कहा कि बाअज़ रियास्तें 30 फ़ीसद स्कालरशिप्स तालिबात को अदा नहीं कर सकें क्योंकि वो अहलीयत की कसौटी पर पूरी नहीं उतर सकी थीं इसलिए सिफ़ारिश की जाती है कि वज़ारत को इस मसला का संजीदगी से जायज़ा लेना चाहीए और मयार-ओ-शराइत में नर्मी पैदा करने पर ग़ौर करना चाहीए ताकि महरूम तालिबात स्कालर शिप्स से इस्तेफ़ादा कर सकें।

दूसरी स्कीमों बिशमोल रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड के इस्तेहकाम, तालीमी कर्ज़ों के सूद में रियायत, बैरून-ए-मुल्क तालीम हासिल करने वाले तलबा के लिए और रियास्ती पब्लिक सर्विस कमीशन और एस एस सी के इलावा यू पी एस सी के इब्तिदाई इम्तेहानात के इनइक़ाद की मंज़ूरी तलबा के हक़ में दी जानी चाहीए।

अज़ला और देही तरक़्क़ीयाती स्कीम पर तवज्जा मर्कूज़ करनी चाहीए और एम सी डैस और एम सी बेस का अहाता ना किए जाने पर तवज्जा देनी चाहीए।

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