Monday , December 18 2017

फलों , तर्कारीयों , गोश्त, दूध और अंडों की क़ीमत में इज़ाफ़ा

मर्कज़ी वज़ीर फाईनानस पी चिदम़्बरम ने ये एतराफ़ किया कि फलों, तर्कारीयों, दूध, गोश्त और अंडों की क़ीमत में इज़ाफे की वजह से इफ़रात-ए-ज़र की शरह में भी इज़ाफ़ा होगया है। उन्होंने उमीद ज़ाहिर की कि क़ीमतों में इज़ाफे की शरह 5 फ़ीसद से कम हो जाएग

मर्कज़ी वज़ीर फाईनानस पी चिदम़्बरम ने ये एतराफ़ किया कि फलों, तर्कारीयों, दूध, गोश्त और अंडों की क़ीमत में इज़ाफे की वजह से इफ़रात-ए-ज़र की शरह में भी इज़ाफ़ा होगया है। उन्होंने उमीद ज़ाहिर की कि क़ीमतों में इज़ाफे की शरह 5 फ़ीसद से कम हो जाएगी क्योंकि हुकूमत और रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया ने कई इक़दामात किए हैं।

उन्होंने कहा कि चिल्लर फ़रोशी का इफ़रात-ए-ज़र का पता चलाना मुश्किल होता है क्योंकि ठोक फ़रोशी की क़ीमत का ईशारीया और सारिफ़ीन की क़ीमत का ईशारीया ग़िज़ाई इफ़रात-ए-ज़र पैदा करते हैं। ग़िज़ाई अजनास की क़ीमतें 24.3 और 46.2 फ़ीसद अली उल-तरतीब रिकार्ड की गई हैं।

गेहूं और चावल बड़ी अश्या-ए-ज़रुरीया हैं। शुक्र की क़ीमत में 6 रुपये फ़ी किलोग्राम कमी हो चुकी है। चिदम़्बरम ने क़ब्लअज़ीं कहा था कि आर बी आई और हुकूमत इफ़रात-ए-ज़र पर क़ाबू पाने के लिए कई इक़दामात कर रहे हैं और इस सिलसिले में कई तजवीज़ों का जायज़ा लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चिल्लर फ़रोशी के इफ़रात-ए-ज़र पर क़ाबू पाना आसान नहीं है लेकिन वो ख़ौफ़ज़दा नहीं हैं। रिज़र्व बैंक ने पालिसी शरह में अक्टूबर की मालीयाती नज़रसानी में 0.25 फ़ीसद इज़ाफ़ा किया है ताकि इफ़रात-ए-ज़र पर क़ाबू पाया जा सके। क़ीमती ग़िज़ाई अजनास, तर्कारियां, ठोक फ़रोशी इफ़रात-ए-ज़र में इज़ाफ़ा करके उसे अक्टूबर में 7 फ़ीसद करचुकी हैं जो जारीया माली साल की अज़म तरीन शरह इफ़रात-ए-ज़र है।

साबिक़ा महीने में ठोक फ़रोशी की क़ीमत पर मबनी इफ़रात-ए-ज़र 6.46 फ़ीसद था। अक्टूबर 2012 में ये 7.32 फ़ीसद था। ग़िज़ाई अजनास की क़ीमत में अक्टूबर में 18.19 फ़ीसद इज़ाफ़ा देखा गया। गुज़िश्ता चंद माह से ठोक फ़रोशी पर मबनी इफ़रात-ए-ज़र में इज़ाफ़ा देखा जा रहा है।

तरकारी की क़ीमतें अक्टूबर में 78.38 और प्याज़ की क़ीमतें 27.21 रिकार्ड की गई हैं। गुज़िश्ता माह की बनिसबत ये 13.37 फ़ीसद इज़ाफ़ा है। तैयार शूदा मसनूआत के इफ़रात-ए-ज़र के आदाद-ओ-शुमार जारी कर दिए गए हैं जो अक्टूबर में 2.5 फ़ीसद इज़ाफ़ा रिकार्ड कर चुके हैं।

TOPPOPULARRECENT