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फ़लस्तीन में आई टी का उरूज

फ़लस्तीन में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी का शोबा बहुत तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है। अगर कम्पयूटर के शोबे में ये रुजहान इसी तरह से जारी रहा तो क्या फ़लस्तीन मुस्तक़बिल में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी में तेज़ी से आगे बढ़ने वाली सरज़मीन

फ़लस्तीन में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी का शोबा बहुत तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है। अगर कम्पयूटर के शोबे में ये रुजहान इसी तरह से जारी रहा तो क्या फ़लस्तीन मुस्तक़बिल में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी में तेज़ी से आगे बढ़ने वाली सरज़मीन बिन सकता है?

इसराईली इक़तिसादी मर्कज़ तिल अबीब की सरहद मशरिक़ की जानिब ग़र्ब-ए-उरदुन से मिलती है। ग़र्ब-ए-उरदु के मुतअद्दिद शहरों में इक़तिसादी तरक़्क़ी ना होने के बराबर है। बरामदात और सरमाया कारी का दूर दूर तक नाम-ओ-निशान नहीं है। लेकिन रमला में सूरत-ए-हाल बिलकुल मुख़्तलिफ़ है। वहां हर कोने पर नई नई कंपनीयां दिखाई देती हैं। इन्ही में से एक मोबिसटाइन (Mobistine) भी है।ये इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी की एक छोटी सी कंपनी है और हसनी अबू समारा इस के मैनेजर हैं। उनके मोताबिक आर्डरज़ की बढ़ती हुई तादाद को देखते हुए कहा जा सकता है कि फ़लस्तीन में आई टी का शोबा बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस के इलावा नई कंपनीयां भी क़ायम हो रही हैं।

2008 में फ़लस्तीन की मजमूई क़ौमी पैदावार में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी का हिस्सा 0,8फ़ीसद था जबकि 2012 में ये बढ़ कर सात फ़ीसद तक पहुंच गया है। इस इज़ाफे़ की वजह सियासी सूरत-ए-हाल भी है। इंटरनेट की आज़ादी की वजह से आई टी कंपनीयों को इसराईल कंट्रोल नहीं कर सकता। तिल अबीब में क़ायम कंपनी सिसको ने भी अपने कई आर्डरज़ फ़लस्तीनी कंपनीयों को दिए हैं।

ज़ीका अबज़ोक सिसको के इसराईली ऑफ़िस में सीनीयर मैनेजर हैं। वो कहते हैं के फ़लस्तीनी इलाक़ों में इस शोबे के माहिर अफ़राद मौजूद हैं और उनके साथ काम करने पर हिन्दुस्तान से भी कम अख़राजात आते हैं, और फ़लस्तीनीयों के साथ काम करना बहुत आसान है।

फ़लस्तीनी इलाक़ों में इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलोजी के बढ़ने के इमकानात वाज़ेह तौर पर मौजूद हैं। वहां कम्पयूटर के शोबे में तालीम हासिल करने के रुजहान में बहुत तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है। हर साल फ़लस्तीनी इलाक़ों से तक़रीबन दो हज़ार तलबा आई टी की पढ़ाई मुकम्मल करते हैं।Mobistine 2010 से काम कर रही है। ये कंपनी अरबी और अंग्रेज़ी ज़बान के स्मार्ट फ़ोन और सेहत के शोबे के लिए एप्लीकेशंज़ बनाती है।

ये आम सारिफ़ के इलावा ख़ुसूसी तौर पर डॉक्टर्स और मरीज़ों के लिए तैय्यार किए जाते हैं। अबू समारा की कंपनी में इस वक़्त पाँच अफ़राद काम करते हैं। ये मुलाज़मीन अपने शोबे के माहिर होने के साथ साथ तजरबाकार भी हैं। अबू समारा कहते हैं कि आए दिन टेक्नोलोजी के बदलते हुए रुजहान और इस शोबे में होने वाली दिन दुगनी और रात चौगुनी तरक़्क़ी की वजह से नए रास्ते खुल रहे हैं और नौजवान नस्ल इस जानिब राग़िब हो रही है। कम्पयूटर माहिरीन के पास मुक़ामी और बैन-उल-अक़वामी इदारों में काम करने के मवाक़े मौजूद हैं। इस के लिए उन्हें फ़लस्तीन से बाहर जाने की भी ज़रूरत नहीं होती।

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