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फ़लस्तीन से अवैध यहूदी बस्तियां हटाने के यूएन के प्रस्ताव को हम नहीं मानेंगे-इज़रायल

इज़रायल  के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने  संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को मानने से इंकार किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव को इसराइल नहीं मानेगा।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फिलीस्तीन में अवैध इजरायली बस्तियों को खत्म करने और वहां जारी अन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव  पारित किया था।

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव इसराइल की नीतियों के लिए बड़ा झटका है।अमरीका के वीटो करने से इनकार करने के बाद शुक्रवार को ये प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पारित हो गया था।

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर अमरीका ने  वीटो करने से मना कर दिया और उसने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।अमरीका पर बरसा इसराइल प्रस्ताव के पक्ष में कुल 14 वोट पड़े जबकि एक सदस्य के तौर पर अमरीका ने वोट नहीं दिया। मिस्र ने इस प्रस्ताव का खाका तैयार किया था लेकिन इसराइल ने ट्रंप से हस्तक्षेप कराया जिसके बाद प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था।

लेकिन मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, सेनेगल और वेनेज़ुएला ने दोबारा इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। खास बात ये है कि अमरीका इस मामले में परंपरागत तौर पर इसराइल का समर्थन करता रहा है लेकिन इस बार उसने ऐसा नहीं किया।यहूदी बस्तियों का मुद्दा इसराइल और फ़लीस्तीनियों के बीच विवाद की जड़ रहा है जिसे दोनों के बीच शांति की राह में एक बाधा के तौर पर देखा जाता है। इसराइल ने वर्ष 1967 में पश्चिमी किनारे और पूर्वी यरुशलम पर कब्ज़ा कर लिया था। तभी से वहां लगभग 140 बस्तियों में करीब 5 लाख यहूदी रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के हिसाब से इन बस्तियों को अवैध माना जाता है लेकिन इसराइल ऐसा नहीं मानता है। संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत समंथा पावर का कहना है कि यह प्रस्ताव ‘ज़मीनी हकीक़त’ बताता है कि बस्तियों की संख्या बढ़ रही है।उन्होंने कहा, ”बस्तियों की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि इसकी वजह से दो-राष्ट्र समाधान ख़तरे में पड़ गया है।

समंथा पावर ने बस्तियों के विस्तार पर समर्थन के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की आलोचना भी की।उन्होंने कहा, ”ऐसा नहीं हो सकता कि आप बस्तियों का विस्तार करते जाएं और संघर्ष ख़त्म करने के लिए दो-राष्ट्र सिद्धांत की बात भी करें।

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