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फ़ातिमा बेगम मुकम्मल हिजाब(परदे) में ख़िदमात अंजाम देने वाली होमगार्ड

(अबू ऐमल)महकमा पुलिस में मुलाज़िम कोई ख़ातून मुकम्मल हिजाब(परदे) का एहतिमाम करते हुए फ़राइज़ अंजाम दे रही है और उसे आला ओहदेदारों-ओ-साथी अमला का भरपूर तआवुन (मदद) हासिल है तो इस बात पर किसी को यक़ीन नहीं आएगा और यक़ीन कर भी लिया जाय त

(अबू ऐमल)महकमा पुलिस में मुलाज़िम कोई ख़ातून मुकम्मल हिजाब(परदे) का एहतिमाम करते हुए फ़राइज़ अंजाम दे रही है और उसे आला ओहदेदारों-ओ-साथी अमला का भरपूर तआवुन (मदद) हासिल है तो इस बात पर किसी को यक़ीन नहीं आएगा और यक़ीन कर भी लिया जाय तो सुनने वालों को हैरत होगी कि पुलिस में मुलाज़मत करते हुए कोई मुकम्मल हिजाब(परदे) का एहतिमाम भी कर सकती है।

लेकिन आज हम आप को एक ऐसी ही बापरदा ख़ातून होमगार्ड से मिलाते हैं जो बड़ी दियानतदारी के साथ अपनी ड्यूटी अंजाम दे रही हैं। 23 साला फ़ातिमा बेगम ज़ौजा अकबर ख़ां गुजिश्ता चार बर्सों से मादना पेट पुलिस स्टेशन में ख़िदमात अंजाम दे रही हैं। वो मुकम्मल पर्दा का एहतिमाम करती हैं। साल 2007 में फ़ातिमा का बहैसीयत होमगार्ड तक़र्रुर अमल में आया था लेकिन उर्दू, तेलगु और अंग्रेज़ी में इन की महारत को देखते हुए पुलिस स्टेशन पर रिसेप्शनिस्ट की ज़िम्मेदारी तफ़वीज़ की(सौंपी) गई।

फ़ातिमा बेगम अंबेडकर ओपन यूनीवर्सिटी से बी ए कर रही हैं और फाईनल एयर में हैं। फ़ातिमा बेगम के बारे में सुन कर हम ने सोचा कि क्यों ना अपने क़ारईन (पढने वालों ) को इस ग़ैरमामूली अज़म-ओ-हौसला वाली ख़ातून के बारे में वाक़िफ़ करवाया जाय। फ़ातिमा बेगम का कहना है कि उन्हें होमगार्ड की नौकरी दिलाने में इन की वालिदा का बहुत अहम रोल है।

मुलाज़मत को अल्लाह का करम क़रार देते हुए वो कहती हैं कि इन की वालिदा ने हर मरहले (मौक़े) पर उन की भरपूर हौसला अफ़्ज़ाई की है जबकि शादी के बाद ससुराल वालों और शौहर का भी उन्हें भरपूर तआवुन (मदद)-ओ-हौसला अफ़्ज़ाई हासिल रही। ख़ासकर हुसूल-ए-ताअलीम(शिक्षा प्राप्ती) के मुआमला में उन के शौहर बहुत हिम्मत अफ़्ज़ाई करते हैं।

फ़ातिमा ने बताया कि इन के वालिद मुहतरम सईदा आबाद में सैक़ल रिपेरिंग का काम करते हैं। उन्हें तीन भाई और एक बहन है। फ़ातिमा का मकान भी सईदा बाद में ही है। आप को बतादें कि मादना पेट पुलिस स्टेशन हैदराबाद का वाहिद पुलिस स्टेशन है जहां कोई ख़ातून मुकम्मल हिजाब(परदे) में अपनी ड्यूटी अंजाम दे रही है। इस पुलिस स्टेशन में 22 होम गार्ड्स ताय्युनात हैं।

फ़ातिमा बेगम की ख़ूबी ये है कि वो इंतिहाई हमदरद, बाअख़लाक़ और दूसरों का ख़्याल रखने वाली ख़ातून है जबकि उन के शाइस्ता रवैय्या (well behavior) से साथी अमला भी मुतास्सिर (प्रभावित ) है। अगर पुलिस स्टेशन से रुजू होने वाले लिखने पढ़ने के काबिल ना हों तो फ़ातिमा फ़ौरी उन की मदद के लिए आगे बढ़ जाती है और उन्हें उन की ज़बान में ही दरख़ास्त या शिकायत लिख कर देती है।

पुलिस स्टेशन आने वाले हर फ़र्द को फ़ातिमा के पास अपना नाम आने का मक़सद, शिकायत किया है, वक़्त और तारीख़ वग़ैरा की इन्ट्री करवानी पड़ती है। अगर कोई ख़ातून छोटी मोटी शिकायत लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचती है तब वो इस तरह के वाक़ियात में ख्वातीन की कामयाबी के साथ कौंसलिंग भी कर देती हैं। फ़ातिमा बेगम पाबंद सोम-ओ-सलात है।

हमारे इस सवाल पर कि आप ने मुकम्मल हिजाब(परदे) को क्यों तर्जीह दी? फ़ातिमा ने कहा कि दरअसल हिजाब(परदे) को वो अपने लिए मुकम्मल हिफ़ाज़ती ढाल तसव्वुर करती हैं। वैसे भी बुर्क़ा या हिजाब(परदे) ख्वातीन की हुर्मत-ओ-वक़ार की अलामत है। इस के इलावा ख़ुद कायनात को पैदा करने वाले हमारे रब ज़ूल जलाल और इस के रसूल सल्लाल्लाह अलैह वसल्लम ने हमें उस की ताकीद की है।

अल्लाह का करम है कि जिस महिकमा में मैं काम कर रही हूँ वहां मेरे साथीयों को मुकम्मल हिजाब(परदे) में मेरे काम करने पर कोई एतराज़ नहीं। डिप्टी कमिशनर पुलिस अकोन सुभरवाल की वसीअ उल-नज़री(broad minded) और मातहतों का एहतिराम करने के जज़बा की सताइश करते हुए फ़ातिमा बेगम ने बताया कि डिप्टी कमिशनर पुलिस अकोन सुभरवाल से जब उन्हों ने इजाज़त तलब की तो अकोन सुभरवाल ने बड़े ही हमदर्दाना अंदाज़ में कहा आप हिजाब(परदे) में ड्यूटी कर सकती हैं और उन्हें इस पर कोई एतराज़ नहीं।

डिप्टी कमिशनर के इन अलफ़ाज़ को कि आप जिस लिबास मैं ख़ुद को Comfortable महसूस करती हैं इस का इस्तिमाल करने पर किसी को एतराज़ नहीं है। दुहराते हुए फ़ातिमा बेगम ने बताया कि एक आला ओहदेदार की ज़बान से इस तरह के अलफ़ाज़ सुन कर उन्हें बे इंतिहा-ए-ख़ुशी हुई और इस से उन की हौसला अफ़्ज़ाई भी हुई। उन्होंने दौरान गुफ़्तगु अपने साथी अमला का तज़किरा करते हुए कहा कि उन्हें अपने साथीयों का भरपूर तआवुन (मदद) हासिल है।

उन्हों ने इन्सपेक्टर मादना पेट के वी सूर्या प्रकाश की भी सताइश की और कहा कि वो हमेशा अपने मातहत अमला की हौसला अफ़्ज़ाई करते हैं। जब हम ने इन्सपेक्टर सूर्या प्रकाश से बात की तो उन्हों ने बताया कि फ़ातिमा बेगम बड़ी संजीदगी से अपनी ख़िदमात अंजाम देती हैं और उन के काम से महिकमा पूरी तरह मुतमइन है। साथी अमला को किसी किस्म की शिकायत नहीं। फ़ातिमा की ड्यूटी सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होती है।

फिर घर जाकर पकवान और घरेलू मसरुफ़ियात में लग जाती हैं। अपने शौहर के बारे में बताया कि वो लिफ़्ट टेक्नीशन हैं और ससुराल वाले उन्हें बहू नहीं बल्कि बेटी की हैसियत से देखते हैं। बहरहाल फ़ातिमा बेगम एक ऐसे महिकमा में मुकम्मल हिजाब(परदे) का एहतिमाम करते हुए ख़िदमात अंजाम दे रही हैं जहां इस किस्म का तसव्वुर तक नहीं किया जा सकता।

फ़ातिमा बेगम हिजाब(परदे) का एहतिमाम करने से हिचकिचाने या शर्माने वाली ख्वातीन के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। इन की शख़्सियत दीगर ख्वातीन -ओ-तालिबात को इस बात का पैग़ाम भी दे रही है कि अल्लाह और इस के रसूल सल्लाल्लाह अलैह वसल्लम की हिदायात पर अमल करते हुए मुकम्मल हिजाब(परदे) में ना सिर्फ तालीम हासिल की जा सकती है बल्कि बिना ख़ौफ़-ओ-ख़तर सरकारी मुलाज़मत भी की जा सकती है।

जहां तक साथी अमला का सवाल है आप के अख़लाक़-ओ-किरदार से ही उन्हें मुतास्सिर (प्रभावित ) किया जा सकता जैसा कि हमारे प्यारे नबी सल्लाल्लाह अलैह वसल्लम का इरशाद मुबारक है तुम में से बेहतरीन शख़्स वो है जिस के अख़लाक़ बेहतर हों।

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