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फ़िकरो परस्त ताक़तों के मुक़ाबला के लिए मुस्लिम। दलित इत्तिहाद की ज़रूरत

हैदराबाद ।१९ । अप्रैल :हिंदूस्तान में ज़ात पात के तास्सुब से मुक़ाबलाकरने के लिए मुस्लिम दलित ओरबी सी तबक़ात को एक ही प्लेटफार्म पर आना ज़रूरी है । तब ही उन को अपना हक़ हासिल हो सकता है। मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी मर्कज

हैदराबाद ।१९ । अप्रैल :हिंदूस्तान में ज़ात पात के तास्सुब से मुक़ाबलाकरने के लिए मुस्लिम दलित ओरबी सी तबक़ात को एक ही प्लेटफार्म पर आना ज़रूरी है । तब ही उन को अपना हक़ हासिल हो सकता है। मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी मर्कज़ बराए मुताला समाजी इख़राज वशमोलीत पालिसी के तहत मुअम्मार दस्तूर डाक्टर भीम राओ अंबेडकर के 121वें पैदाइश के सिलसिले में मर्कज़ी कुतुब ख़ाना यूनीवर्सिटी कैंपस में 16 अप्रैल को ख़ुसूसी प्रोग्राम में प्रोफ़ैसर कांचा अलैह डायरैक्टर CSSEIP और प्रोफ़ैसर सत्य ना रावना ने इन ख़्यालात का इज़हार किया। प्रोफ़ैसर अलैह ने कहाकि हिंदूस्तान एकजमहूरी मुलक है और यहां हुर्रा यक तबक़ा को आज़ादी होना लाज़िमी है।

उन्हों ने हैदराबाद के पुराने शहर में हुए फ़िर्कावाराना फ़साद और उस्मानिया यूनीवर्सिटी के वाक़िया के हवाले से कहा मुस्लिम दलित और बी सी मुत्तहिद होकर ही तास्सुब से मुक़ाबला कर सकते हैं तब ही हिंदूस्तान तरक़्क़ी कर सकता है जबकि तमाम तबक़ात को मुसावियाना हुक़ूक़ मिलने चाहिए। प्रोफ़ैसर सत्य ना रावना ने कहाकि मुमताज़ समाजी मुसल्लेह ज्योति बाफोले ने हिंदूस्तान में तालीम की एहमीयत को उजागर किया।उन्हों ने हुर्रा यक को मुसावियानातालीम देने की बात कही कार्ल मार्क्स के बेशतर नज़रियात से मुत्तफ़िक़ थी। उन्हों ने कहा कि फूले में एक मुस्लिम मुअल्लिम ने हुसूल-ए-इलम के लिए मुहर कि पैदा किया था, इस तरह उन पर इस्लामी तालीमात का असर साफ़ नज़र आता है।

समाजी इन्क़िलाब असरी तालीम के बगै़र मुम्किन नहीं। प्रोफ़ैसर पी ईल वेलवीशर‌ राउ सदर शोबा मास कम्यूनिकेशन‌ ऐंड जर्नलिज़्म ने सरकरदा 10 सरकारी और ख़ानगी इदारों के नाम बताए जहां उन ख़ानदानों की बरतरी है जो आंधरा प्रदेश में हुकूमत कर रहे हैं । उन्हों ने कहाकि सयासी समाजी और तालीमी मैदान प्रभी मख़सूस तबक़ा का क़बज़ा है यहां तक कि जमहूरीयत के अहम सतून मीडीया प्रभी बिरौली क़ाबिज़ है।

मलिक की सहाफ़त का 80 फ़ीसद उस तबक़े से ताल्लुक़ रखता है जबकि मुस्लमानों का तनासब फ़ीसद और दलित तबक़ा का हाल बुरा है। प्रोफ़ैसर टी वी कटी मनी सदर शोबा-ए-हिन्दी ने भी ख़िताब किया। डाक्टर नागेश्वर राव‌ ने शुक्रिया अदा किया।

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