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फ़िर्कावाराना फ़सादात, आर ऐस ऐस कारकुनों का एतराफ़-ए-जुर्म

शहर में फ़िर्कावाराना फ़सादात की साज़िश में गिरफ़्तार आर ऐस ऐस कारकुनों ने पुलिस के रूबरू एतराफ़-ए-जुर्म करलिया। उन्हों ने अपने इक़बालीया ब्यान में बताया कि इलाक़ा कुरमा गोड़ा और मादन्ना पेट में मुस्लमानों को हिंदूओं पर ग़ाल

शहर में फ़िर्कावाराना फ़सादात की साज़िश में गिरफ़्तार आर ऐस ऐस कारकुनों ने पुलिस के रूबरू एतराफ़-ए-जुर्म करलिया। उन्हों ने अपने इक़बालीया ब्यान में बताया कि इलाक़ा कुरमा गोड़ा और मादन्ना पेट में मुस्लमानों को हिंदूओं पर ग़ालिब होने ना देना उन का असल मक़सद है। चुनांचे रामनवमी और हनूमान जयंती के मौक़ा पर मुस्लमानों को मुश्तइल करने की कोशिश की गई थी लेकिन नाकामी हुई जिस के बाद उन्हों ने मंसूबा बंद तौर पर मंदिर में गाय के पैर रखने और सबज़ रंग फेंकने की साज़िश तैय्यार की।

इस के बाद शहर में फ़िर्कावाराना फ़साद भड़क उठा। स्पैशल इनोसटीगेशन टीम ने जी ऐच एम सी के सूपरवाइज़र एन नागराज , के करण कुमार , एन रमेश उर्फ़ चुना और के सिरी दयानंद सिंह जो आर ऐस इसके कारकुन बताए जाते हैं को मादन्ना पेट हनूमान मंदिर वाक़िया में गिरफ़्तार किया और उन की तफ़तीश की जिस में मुल्ज़िमीन ने ये एतराफ़ किया कि उन्हें मंदिर में गाय के पैर और हरा रंग डालने के लिए आर ऐस एस के एक कारकुन सरीनवास उर्फ़ सलमान सरीनवास ने उकसाया था ।

मुल्ज़िमीन ने अपने इक़बालिया ब्यान में ये बताया कि मादन्ना पेट हनूमान मंदिर में फेंके गए गाय के पैर चंचल गौड़ा में वाक़ै गाय के गोश्त की दूकान से 100 रुपये में ख़रीदे थे जबकि हरार नग सईदा बाद अमीन कॉलोनी में वाक़ै संगम इलेक्ट्रीकल्स और हार्डवेयर शाप से ख़रीदा था।

इन नौजवानों ने बताया कि उन्हें तवक़्क़ो थी कि दोनों हिन्दू तहवारों के मौक़ा पर झंडियां नसब करने और ऊंची आवाज़ में टेप रिकार्डरस बजाने के नतीजा में मुक़ामी मुस्लमान मुश्तइल होंगे जिस को बहाना बनाकर जज़बाती हिन्दू नौजवान मुस्लमानों पर हमला करदेंगे मगर उन की इस इश्तिआल अंगेज़ी के बावजूद मुक़ामी मुस्लमानों ने सब्र-ओ-तहम्मुल से काम लिया

जिस के बाद सरीनवास ने इलाक़ा में फ़िर्कावाराना मुनाफ़िरत पैदा करते हुए मुस्लमानों पर हमला करवाने के लिए मंदिर में गाय के पाए और सबज़ रंग रात के अंधेरे में फेंकने का मंसूबा बनाया जिस में वो कामयाब होगए ।इस वाक़िया के बाद इलाक़ा मादन्ना पेट और सईदा बाद में फ़िर्कावाराना फ़साद फूट पड़ा था।

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