Saturday , December 16 2017

फ़िलपाइन की हेड नर्स मुशर्रफ़ बा इस्लाम

अबदुल करीम अबू बकर मैडीकल सैंटर में 55 साला डरवीस फ़्यूल जो हेड नर्स के फ़राइज़(ज़िम्मेदारी ) अंजाम दे रही है। गुज़शता हफ़्ता वो मुशर्रफ़ बह इस्लाम हो गई(इस्लाम कोबूल कर ली), जिस की वजह से हॉस्पिटल का पूरा स्टाफ़ इंतिहाई मसरूर है।

अबदुल करीम अबू बकर मैडीकल सैंटर में 55 साला डरवीस फ़्यूल जो हेड नर्स के फ़राइज़(ज़िम्मेदारी ) अंजाम दे रही है। गुज़शता हफ़्ता वो मुशर्रफ़ बह इस्लाम हो गई(इस्लाम कोबूल कर ली), जिस की वजह से हॉस्पिटल का पूरा स्टाफ़ इंतिहाई मसरूर है। क़ब्ल अज़ीं (इस्से पहले ) वो एक कैथोलिक ईसाई थी और गुज़शता पाँच सालों से मज़कूरा मैडीकल सैंटर हॉस्पिटल में बरसर-ए-कार थी।

इस मौक़ा पर हॉस्पिटल के CEO और एगज़ीकेटीव डायरैक्टर डाक्टर तौफ़ीक़ ने कहा कि हम सब के लिए ये फ़ख़र की बात है कि डरवीस जिस का नाम तबदील करके दानिया रखा गया है, ने ख़ुद अपनी मर्ज़ी से मज़हब इस्लाम क़बूल किया। इस पर कोई दबाव नहीं डाला गया। इस के लिए में अपने तमाम मुस्लमान स्टाफ़ से इज़हार-ए-तशक्कुर(शुकरिया अदा) करता हूँ,

कि उन्हों ने डरवीस (दानिया) को इस्लाम की तालीमात समझने में अपना भरपूर तआवुन(मदद) पेश किया। उन्हों ने कहा कि यहां काम करने वाले महज़ स्टाफ़ अरकान नहीं हैं बल्कि हम एक ख़ानदान की तरह रहते हैं। इस मौक़ा पर नौ मुस्लिम दानिया ने अरब न्यूज़ से बातचीत करते हुए कहा कि इस का ख़ानदान कैथोलिक है

और उसे कैथोलिक स्कूल में ही पढ़ाई के लिए भेजा गया, लेकिन इस ने कभी कैथोलिक मज़हब पर अमल नहीं किया। कैथोलिक स्कूल में जाना उस की मजबूरी थी। मज़हब के बारे में मुझे कोई ख़ास मालूमात नहीं थी। कैथोलिक माहौल में पली बढ़ी तो अपने आस पास बचपन से ही वही माहौल पाया, लेकिन इस के बावजूद वो मज़हब बेज़ार रही।

1990 में जब दानिया पहली बार सऊदी अरब आई तो उसे मुस्लमानों से मुलाक़ात का मौक़ा मिला और उन का तर्ज़-ए-ज़िदंगी और मज़हबी रवादारी (यकजहती)ने इस्लाम से क़रीब तर करदिया।

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