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फ़्रांसीसी पार्लीमैंट में बिल की मंज़ूरी पर एहतिजाज, तुर्क सफ़ीर की पैरिस से बाज़ तलबी

अनक़रा 24 दिसमबर (एजैंसीज़) फ़्रांसीसी पार्लीमैंट के ऐवान-ए-ज़ेरीं में एक मुतनाज़ा बिल की मंज़ूरी के ख़िलाफ़ सख़्त एहतिजाज करते हुए तुर्की ने पैरिस से अपने सफ़ीर को वापिस तलब करलिया है । फ़्रांसीसी पार्लीमैंट ने एक बिल मंज़ूर कि

अनक़रा 24 दिसमबर (एजैंसीज़) फ़्रांसीसी पार्लीमैंट के ऐवान-ए-ज़ेरीं में एक मुतनाज़ा बिल की मंज़ूरी के ख़िलाफ़ सख़्त एहतिजाज करते हुए तुर्की ने पैरिस से अपने सफ़ीर को वापिस तलब करलिया है । फ़्रांसीसी पार्लीमैंट ने एक बिल मंज़ूर किया है , जिस में 1915 में इजतिमाई हलाकतों को नसल कुशी या क़तल-ए-आम क़रार देने से इनकार किया गया है ,

जिस पर इस इलाक़ा की सब से बड़ी ताक़त तुर्की ने सख़्त एहतिजाज किया है , क्योंकि 1915-में तुर्की में सलतनत उस्मानिया के दौरान आर्मेनियाई अफ़राद के इजतिमाईह लाकतों के जुर्म में तुर्की को शामिल किया जा सकता है । फ़्रांसीसी पार्लीमैंट में इस बिल पर हुई राय दही की गिनती नहीं की गई क्योंकि अरकान की अक्सरीयत अपने हाथ उठाते हुए बिल की ताईद की थी। ये बिल अब सैनेट से रुजू किया जाएगा, जहां 5 साल क़बल उस को मुस्तर्द करदिया गया था।

तुर्की ने इस मुसव्वदा क़ानून में लफ़्ज़ नसल कुशी के इस्तिमाल की पुरज़ोर मुख़ालिफ़त की है ।

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