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फिर घोटाले का साया : पैसे निकालने के लिए लेबर वज़ीर की फर्जी चिट्‌ठी बनाई

एक साल से ठप आरएसवीवाई अभी शुरू भी नहीं हो सकी है और घोटाले का साया मंडराने लगा है। मौजूदा लेबर वज़ीर जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के फर्जी खत का सहारा लेकर मंसूबा में शामिल होने के मामले का खुलासा हुआ है। लेबर वसायल महकमा जांच में पाया क

एक साल से ठप आरएसवीवाई अभी शुरू भी नहीं हो सकी है और घोटाले का साया मंडराने लगा है। मौजूदा लेबर वज़ीर जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के फर्जी खत का सहारा लेकर मंसूबा में शामिल होने के मामले का खुलासा हुआ है। लेबर वसायल महकमा जांच में पाया कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन (टीपीए) का काम करने वाला मेडिकेयर ई सर्विसेज के हक़ में लिखा गया यह खत फर्जी है। फर्जीवाड़े की इल्ज़ाम पर एजेंसी पर सनाह का हुक्म दिया गया है।

मेडिकेयर ई सर्विसेज को ओरियंटल इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने मुजफ्फरपुर में टीपीए का काम दिया था। प्राइवेट अस्पतालों की मिलीभगत से हमल घोटाले को अंजाम देने का इल्ज़ाम है। जाली बिल अदायगी कर इंसुरेंस रकम का बंदरबांट करने के इल्ज़ाम में इंसुरेंस कंपनी ने इसे 2010 में ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। खत में मौजूदा लेबर वज़ीर जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने ज़ाती महकमा सेक्रेटरी को लिखा है कि मेडिकेयर ई सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता को ब्लैक लिस्टेड करने का कोई मतलब नहीं है।

ज़ाती महकमा सेक्रेटरी ने खत की जांच कराई, तो पाया कि खत में जो नंबर भी फर्जी है। क़ौमी सेहत इंसुरेंस मंसूबा 2008-09 से रियासत में शुरू हुई थी। इलाज के लिए तीन सालों में 457 करोड़ की इंसुरेंस रकम दी गई। इनमें करीब 200 करोड़ से ज़्यादा इंसुरेंस रकम का फर्जी तरीके से बंदरबांट कर लिया गया।

कैसे हुआ घोटाला

अस्पताल से मिलकर बिना ऑपरेशन किए टीपीए कार्ड स्क्रैच से रकम निकाल लेता था। इलाज की सही की जांच की गलत रिपोर्ट देकर भी रकम निकाली जाती थी।

रियासत या रियासत के बाहर मंसूबा में फेहरिस्त किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में एड्मिट के दौरान फाइदा लेने वाले को तमाम दवाएं फ्री दस्तयाब कराई जाती हैं। फ्री खाना, खून जांच, ए€क्सरे, पैथोलोजी व अल्ट्रासाउंड की भी सहूलत मिलती है। डिस्चार्ज के वक़्त मरीज को पांच दिनों की दवा फ्री दी जाती है। साथ ही आने-जाने का किराया दिया जाता है, यह रकम 100 से 1000 रुपए के दरमियान होती है।

300 करोड़ की तजवीज

रियासती हुकूमत ने 2014-15 में इस मंसूबा के लिए 75 करोड़ का एलॉटमेंट किया है, जबकि 75 फीसद रकम यानी 225 करोड़ मरकज़ी हुकूमत देगी। अहले खाना को इंसुरेंस कंपनियों के जरिये स्मार्ट कार्ड दिया जाता है। खानदान के मुखिया और दीगर मेंबरों की शिनाख्त के बाद 30 रुपए लेकर इंसुरेंस कंपनी स्मार्ट कार्ड दस्तयाब कराती है। इसकी बुनियाद पर ही इलाज होता है।

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