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फिल्में बनाना मेरे बस की बात नहीं रही :देवेन वर्मा

अपने ज़माने के मशहूर करेक्टर ऐक्टर और कॉमेडियन देवेन वर्मा यूं तो अब पूणे मुंतक़िल हो गए हैं लेकिन कभी कभी मुंबई की फ़िल्मी पार्टीयों में नज़र आ जाते हैं । हालिया दिनों में जब उन की मीडीया से मुलाक़ात हुई तो पुरानी बातों का सिलसिला च

अपने ज़माने के मशहूर करेक्टर ऐक्टर और कॉमेडियन देवेन वर्मा यूं तो अब पूणे मुंतक़िल हो गए हैं लेकिन कभी कभी मुंबई की फ़िल्मी पार्टीयों में नज़र आ जाते हैं । हालिया दिनों में जब उन की मीडीया से मुलाक़ात हुई तो पुरानी बातों का सिलसिला चल निकला ।

उन्होंने कहा कि ब्लैक ऐंड वाईट फिल्मों से कलर फिल्मों तक का दौर बड़ा तवील ( लंबा) रहा जहां उनकी देवर फ़िल्म बहुत कामयाब हुई थी जिस में धर्मेन्द्र और शर्मीला टैगोर ने मर्कज़ी किरदार निभाए थे ।

देवेन वर्मा ने आगे चल कर ख़ुद अपनी प्रोडक्शन कंपनी नूरतना फिल्म के नाम से खोल ली । उन्होंने बताया कि शशी कपूर और ज़ीनत अमान वाली फ़िल्म चोरी मेरा काम के लिए बेहतरीन कॉमेडियन का उन्हें फ़िल्म फेयर ऐवार्ड भी मिला था । अपने प्रोडक्शन हाउस से उन्होंने यक़ीन ,बड़ा कबूतर और बेशर्म जैसी फिल्में बनाईं इस के बाद उन्होंने ये सिलसिला बंद कर दिया क्योंकि फिल्में बनाना उनके बस की बात नहीं रही ।

बदलते वक़्तों के तक़ाज़ों को पूरा करना मुश्किल होता गया और उम्र भी ज़्यादा हो गई थी । देवेन वर्मा की मशहूर फिल्मों में गुमराह ,अनूपमा ,कभी कभी ,चोरी मेरा काम ,गोलमाल ,अंगूर ,मिलन और धुनदहीं । उन्होंने कहा कि कभी कभी किसी मराठी फ़िल्म के मुहूर्त या कामयाबी के जश्न में वो शिरकत कर लेते हैं वर्ना पूणे में वो एक पुर सुकून ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं जहां मुंबई जैसी भीड़भाड़ नहीं है ।

इनका कहना है कि आज के दौर में फ़िल्मसाज़ी इंतिहाई ज़हनी कश्मकश और माली मुश्किलात का नाम है । उन्होंने आँजहानी (स्वर्गीय) फ़िल्म अदाकार विनोद मोहरा का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक ही फ़िल्म गुरु देव बनाई थी जिस में अनील कपूर ,ऋषि कपूर और सिरी देवी ने अहम रोल निभाए थे लेकिन फ़िल्म बनाने के दौरान उन्हें इतनी मुश्किलात का सामना करना पड़ा कि बिलआख़िर दिल का दौरा पड़ने पर वो फ़ौत हो ( गुजर) गए ।

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