Tuesday , December 12 2017

फेयर प्राइस शाप से राशन की ब्लैक मार्किटिंग,अवाम बार-बार चक्कर काटने पर मजबूर

हैदराबाद १३ (सियासत न्यूज़) हुकूमत की जानिब से फिर प्राइज़ शॉप्स मैं शफ़्फ़ाफ़ियत पीद अकऱ्ने ,हुकूमत ख़ाह कितना भी दावे करले ,ये महिकमा शायद ही कभी अपने वजूद को कुरप्शन और ब्लैक मार्किटिंग से महफ़ूज़ रख सकी। क्योंकि चंद मुख़लिस ओ

हैदराबाद १३ (सियासत न्यूज़) हुकूमत की जानिब से फिर प्राइज़ शॉप्स मैं शफ़्फ़ाफ़ियत पीद अकऱ्ने ,हुकूमत ख़ाह कितना भी दावे करले ,ये महिकमा शायद ही कभी अपने वजूद को कुरप्शन और ब्लैक मार्किटिंग से महफ़ूज़ रख सकी। क्योंकि चंद मुख़लिस ओहदेदारों कीजानिब से मुताल्लिक़ा राशन डीलरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने या इंतिबाह जारी किए जाने के बावजूद राशन शाप डीलर्स के रवैय्ये में कोई तबदीली नहीं आई है और हमशा की तरह ये डीलर्स, आ ज ख़तन हो गया, कल आओ, परसों आओ की रट लगाते हुए अवाम को फ़िराते रहते हैं।

मसला ये नहीं है कि हुकूमत की जानिब से उन्हें मतलूबा अशीया बरवक़्त फ़राहम की जाती है या नहीं , मसला ये है कि ज़्यादा तर राशन शाप डीलर्स,उन्हें मुताल्लिक़ा महिकमा से मिलने वाले ग़िज़ाई अशीया की ब्लैक मार्किटिंग करदेते हैं,जिसके नतीजे में मज़कूरा अशीया की क़िल्लत हो जाती है और फिर राशन शाप के डीलर्स राशन कार्ड होल्डर्स पर बगै़र किसी झिझक के ये वाज़िह कर देते है कि फलां चीज़ खत्म‌ हो गई ,लिहाज़ा बाद में आओ ,फलां चीज़ खत्म‌ हो गई आइन्दा माह आओ नतीजा ये होता है कि लोगों को घंटों हरने के बावजूद भी सारी चीज़ें नहीं मिल रही हैं ।

ज़ेरनज़र‌ तस्वीर में एक किराना स्टोर के मालिक को पुराने शहर के एक राशन शाप से शुक्र का थैला ले जाते हुए देखा जा सकता हैं,जोकि तातील के दिन की हैं मुक़ामी अफ़राद की जानिब से इत्तिला मिलने के बाद नुमाइंदा सियासत ने जब मुताल्लिक़ा सिवल स्पलाईज़ इन्सपैक्टर से राब्ता किया तो उन्हों ने मज़कूरा अशीया वापिस दुकान में रखवा देने का तीक़न दिया और साथ ही ये वज़ाहत की मज़कूरा डीलर्स आइन्दा ऐसा ना करने का तीक़न भी दिया हैं।

राशन शाप के डीलर्स से जब उसकी वज़ाहत तलब की तो वो मुख़्तलिफ़ बहाने बनाने लगे । ताहम बाद में ये उज़्र पेश किया कि साहिब ,कमीशन इस क़दर कम और अशीया की फ़रोख्त का तरीका-ए-कार इस क़दर पेचीदा है कि अगर ईमानदारी से तमाम अशीया राशन कार्ड होल्डरों में तक़सीम किया जाय उन्हें घर चलाना भी दशोरा होजाई, इसलिए कभी कुभार ऐसा करना पड़ता है ।

सवाल ये है कि इस तरह की ब्लैक मार्किटिंग कभी कुभार होती है या हमेशा ..ये तो डीलर्स ही बेहतर जान सकते हैं , मगर इस तरह करने से आम आदमी जो सब काम छोड़कर केलो दो केलो अशीया केलिए घंटों क़तार में टहर कर मायूस लौट जाते हैं ,इसका ज़िम्मेदार कौन हैं?।आप किसी भी फेयर प्राइस शाप यानी राशन शाप पर टिहरी हुई लंबी क़तारों का नज़ारा कीजिए ,जिसमें अक्सरीयत उम्र दराज़ और ज़ईफ़ख़वातीन की होती है याफ़र वो बच्चे होते हैं जो स्कूल नागा करके राशन के लिए क़तार में ठ‌हरे होते हैं,ये लोग अपने दीगर मसरुफ़ियात को छोड़कर घंटों क़तार में टहरकर अपनी अपनी बारी का इंतिज़ार करते हैं मगर क़तार में ठ‌हरा हवाहर फ़र्र द ख़ुशनसीब नहीं होता,कई ऐसे अफ़राद होते हैं जिनकी बारी आने तक राशन का नाम निहाद कोटा ख़त्म‌ हो चुका होता हैं,जिसके नतीजे में लोगों को बार-बार राशन शॉप्स के चक्क्र काटने पड़ रहे हैं।

ज़राए के मुताबिक़ ,इलाक़ा चंदरायन गट्टा ,हाफ़िज़ बाबा नगर,चशमा ,वटे पली ,फ़लकनुमा ,ताड़बन,काले पत्थर , तीगल कनटा ,नवाब साहिब कनटा ,किशन बाग़ और दूध बाउली के इलाक़ों में मौजूद ज़्यादा तर राशन शॉप्स के कार्ड होल्डर्स अपने डीलर्स की इस आदत से बदज़न हैं ,मज़कूरा कार्ड होल्डर्स के दरमियां उमूमी शिकायत यही है कि,उनके मुताल्लिक़ा राशन शाप से हुकूमत की जानिब से जो अश्या फ़राहम की जाती हैं वो तमाम चीज़ें उन्हें नहीं दी जाती हैं और एक चीज़ के लिए उन्हें पाँच दस बार चक्कर‌ लगाना पड़ता हैं।

दरअसल , अवामी निज़ाम तक़सीम (पी डी ऐस)का तरीका-ए-कार ही इस क़दर बदनज़मी का शिकार है कि ग़रीब अवाम की ज़िंदगी का ज़्यादा तर हिस्सा राशन शाप का चक्कर‌ लगाने में ही सिर्फ हो जाता है । ..सवाल ये है कि दिन बदिन बढ़ती हुई महंगाई ,ना इंसाफ़ी और बदउनवानी ,जिन ख़ानदानों के लिए ज़िंदगी और मौत का मसला बनती जा रही है ,उनके लिए अगर राशन शाप के ज़रीया भी पेट की आग बुझाना लोहे के चुने चबाने के बराबर हो जाए तो आख़िर ग़रीब अवाम क्या करें और कहां जाएं?।

TOPPOPULARRECENT