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फॉरेस्टर को जिंदा जलाए जाने के मामले में फंसे वज़ीर, CID के हाथ लगे दस्तावेज

नक्सली तंजीम चलाने के इल्ज़ाम का सामना कर रहे झारखंड के ज़ीराअत वज़ीर योगेंद्र साव की मुश्किलें मुसलसल बढ़ती जा रही हैं। एक फॉरेस्टर को जिंदा जलाने के मामले में मुल्ज़िम योगेंद्र साव के खिलाफ सीआईडी को अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। 1990 मे

नक्सली तंजीम चलाने के इल्ज़ाम का सामना कर रहे झारखंड के ज़ीराअत वज़ीर योगेंद्र साव की मुश्किलें मुसलसल बढ़ती जा रही हैं। एक फॉरेस्टर को जिंदा जलाने के मामले में मुल्ज़िम योगेंद्र साव के खिलाफ सीआईडी को अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। 1990 में हजारीबाग के केरेडारी थाना इलाक़े में गैर कानूनी माइनिंग का मुखालिफत करने वाले फॉरेस्टर को जिंदा जला दिया गया था।

उग्रवादी तंजीम झारखंड टाइगर ग्रुप के सरगना राजकुमार गुप्ता ने सीआईडी तहक़ीक़ात में योगेंद्र साव को तंजीम का अहम बताया है। जेल में बंद गुप्ता ने सीआईडी टीम को पूछताछ में दोहराया है कि झारखंड टाइगर फोर्स वज़ीर ने ही बनाया है। साव के खिलाफ 1994 में कोयला चोरी से मुतल्लिक़ एक मामले में भी चार्जशीट दाखिल है।

ज़िराअत वज़ीर योगेंद्र साव पर झारखंड टाइगर ग्रुप के सरबराह होने के अलावा एक और मुजरिमाना तंजीम का सरपरस्त होने का मामला भी सामने आ रहा है। गुजिशता महीने लातेहार पुलिस की गिरफ्त में आए नौ मुजरिमों के बयान के मुताबिक, मुजरिमाना तंजीम झारखंड बचाओ आंदोलन को वज़ीर योगेंद्र साव का तहफ़्फुज़ हासिल है।

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