Thursday , August 16 2018

बंगला देश ने बाबू जगजीवन राम को जंगी हीरो क़रार दिया

आज़ादी हासिल करने के 41 साल बाद बंगला देश ने हिंदूस्तान के इस वक़्त के वज़ीर दिफ़ा बाबू जगजीवन राम को एज़ाज़ पेश करने का फैसला किया है और उन्हें जंगी हीरो क़रार दिया है और कहा कि उन्हों ने 1971 की जंग-ए-आज़ादी में अहम रोल अदा किया था । साबिक़ व

आज़ादी हासिल करने के 41 साल बाद बंगला देश ने हिंदूस्तान के इस वक़्त के वज़ीर दिफ़ा बाबू जगजीवन राम को एज़ाज़ पेश करने का फैसला किया है और उन्हें जंगी हीरो क़रार दिया है और कहा कि उन्हों ने 1971 की जंग-ए-आज़ादी में अहम रोल अदा किया था । साबिक़ वज़ीर दाख़िला को जो सपा सनामा पेश किया गया इस में तहरीर है कि बाबू जगजीवन राम ने आख़िरी हमले केलिए हिंदूस्तानी और बंगला देशी अफ़्वाज की मुशतर्का कमान तशकील देने में अहम रोल अदा किया था और ये फैसला बंगला देश की आज़ादी का ज़ामिन बना ।

सपा सनामा में तहरीर किया गया है कि उन्हों ने बंगला देशी मुजाहिदीन आज़ादी को ट्रेनिंग हथियार और दीगर स्पलाईज़ फ़राहम करने की कोशिशों में अपनी तरफ‌ से हर मुम्किना मदद की और जंगी हिक्मत-ए-अमली को बाहमी राबतों के ज़रीया मुस्तहकम बनाया था । ताहम सियासत की तारीख उन्हें उन के तारीख़ी पारलीमानी बयान केलिए याद रखेगी जो उन्हों ने 16 डिसमबर 1971 को दिया था जिस में उन्हों ने बंगला देश की आज़ादी का ऐलान किया था ।

उन्हों ने हिंद । बंगला मुशतर्का फ़ौज से पाकिस्तान की शिकस्त के फ़ौरी बाद उस वक़्त ऐलान किया था मग़रिबी पाकिस्तानी अफ़्वाज गैर मशरूत तौर पर बंगला देश में ख़ुद सपुर्द होचुकी हैं। ढाका एक आज़ाद मुल़्क की आज़ाद राजधानी बन गया है । बंगला देश के सदर ज़ुल अलरहमन और वज़ीर आज़म शेख हसीना वाजिद से बाबू जगजीवन राम के नवासे और मौजूदा स्पीकर लोक सभा मीरा कुमार के फ़र्ज़ंद अंशुल अवेजेत ने ये अवार्ड हासिल किया ।

अवेजेत ने इस अवार्ड के हुसूल के बाद पी टी आई से बात चीत करते हुए कहा कि वो बहुत ख़ुश हैं । वो समझते हैं कि इन की इज़्ज़त अफ़्ज़ाई हुई है और वो इज़हार-ए-तशक्कुर करते हैं। इस अवार्ड से बंगला देश की आज़ादी से बाबू जगजीवन राम के ताल्लुक़ की याद ताज़ा होती है ।

अवेजेत पोलीटिक्ल हिस्ट्री के तालिब-ए-इल्म हैं और फ़िलहाल वो सामरा जीत के मौज़ू पर बैरून मुलक डॉक्टरेट कर रहे हैं। उन्हों ने कहा कि 16 साल की उम्र तक वो बाबू जगजीवन राम को इंतिहाई महबूब शख़्स के तौर पर देखा करते थे । बाबू जगजीवन राम उन्हें क़दीम हिंदूस्तान की कहानियां सुनाया करते थे ।

उन्हों ने कहा कि इस जंग के ताल्लुक़ से बाबू जगजीवन राम कहा करते थे कि वो जंग के हक़ में नहीं हैं लेकिन वो चाहते हैं कि वहां इंसाफ़ हो क्योंकी पाकिस्तानी अफ़्वाज बंगला देश में नसल कुशी में मसरूफ़ थीं और हिंदूस्तान पर हमले करती थी । दिफ़ाई तजज़िया निगारों और माहरीना के अलावा साबिक़ा फौजियों ने भी बंगला देश की जद्द-ओ-जहद आज़ादी में बाबू जगजीवन राम के रोल की सताइश की है । इस वक़्त के इस्टर्न कमान के लेफ़टननट जनरल ( रीटाइरड ) जय एफ आर जैकब ने बाबू जगजीवन राम के ताल्लुक़ से कहा था कि वो हिंदूस्तान के तमाम वुज़राए दिफ़ा में सब से बेहतर थे ।

TOPPOPULARRECENT