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बच्ची की इस्मतरेज़ि करने वाले पर कोई रहम नहीं

नई दिल्ली, 22 मई: आठ साल की बच्ची का रेप करने वाले चार बच्चों के बाप पर किसी तरह का रहम नहीं किया जा सकता। उसका बच्चों की दुहाई देना महज फरेब है। यह तब्सिरा सुप्रीम कोर्ट ने एक मुल्ज़िम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए की।

नई दिल्ली, 22 मई: आठ साल की बच्ची का रेप करने वाले चार बच्चों के बाप पर किसी तरह का रहम नहीं किया जा सकता। उसका बच्चों की दुहाई देना महज फरेब है। यह तब्सिरा सुप्रीम कोर्ट ने एक मुल्ज़िम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुल्ज़िम ने आठ साल की बच्ची के मुस्तकबिल के साथ खिलवाड़ किया है। ऐसे में उसकी सजा को कम नहीं किया जा सकता।

जस्टिस बीएस चौहान और जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने मशरिकी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में दस साल पहले हुई वारदात के मुजरिम श्याम नारायण की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए ख़्वातीन के साथ हो रहे जिंसी जराइम पर गहरी तशवीश जाहिर की।

बेंच ने कहा कि मुजरिम का वहशीपना इतना भयानक था कि वारदात के फौरन बाद बच्ची अपने मां-बाप को सच्चाई भी नहीं बता सकी। वाकिया के बाद उसने डॉक्टर से कहा कि टॉयलेट में गिरने की वजह से उसे चोट आई है।

लेकिन डॉक्टर ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया। वाकिया के दस दिन बाद वह अपनी मां को सच बताने की हिम्मत जुटा सकी। इस वजह से 29 अक्तूबर, 2003 को हुई वारदात की एफआईआर 10 नवंबर को दर्ज हो सकी। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने में ताखीर को जायज ठहराया।

अदालत ने कहा कि आठ साल की बच्ची को इस कदर धमकाया गया था कि वह अपने वालदैन के सामने भी सच बोलने की हिम्मत नहीं कर पाई।

मुजरिम ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाते वक्त धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को कुछ कहा तो उसे और उसके घर वालों को तबाह कर दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुजरिम बेहद शातिर है। वाकिया के बाद वह बच्ची को पहले लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल और फिर जीटीबी अस्पताल भी ले गया। उसका आखिर तक यह कोशिश रही कि बच्ची सच न बता सके।

मुल्ज़िम को उम्र कैद के बजाए आईपीसी की धारा 376 के तहत कम से कम दस साल की सजा देने की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आठ साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाकर गुनहगार ने खुशहाल जीवन की उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

रेप एक खौफनाक जुर्म है और मुतास्सिरा की जिंदगी बरबाद हो जाती । इसलिए दरिंदे पर रहम का सवाल ही नहीं उठता।

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