बच्चों के नाखून उखाड़कर लगाया जा रहा है इलेक्ट्रिक शॉक

बच्चों के नाखून उखाड़कर लगाया जा रहा है इलेक्ट्रिक शॉक
बशर अल असद की हुकूमत की तरफ से सीरियाई बागियों और शहरियों पर जुल्म की खबरें बैनुलकवामी कम्युनिटी के लिए फिक्र का मौजू बनी हुई हैं। ऐसे में खाना जंगी की मार झेल रहे सीरिया में बच्चों के इस्तेहसाल और उनके साथ किए जा रहे गैर इंसानी स

बशर अल असद की हुकूमत की तरफ से सीरियाई बागियों और शहरियों पर जुल्म की खबरें बैनुलकवामी कम्युनिटी के लिए फिक्र का मौजू बनी हुई हैं। ऐसे में खाना जंगी की मार झेल रहे सीरिया में बच्चों के इस्तेहसाल और उनके साथ किए जा रहे गैर इंसानी सुलूक की खबरें भी सामने आई हैं।

अकवाम मुत्तहदा की रिपोर्ट के मुताबिक, सीरिया में बच्चों पर खौफनाक जुल्म किए जा रहे हैं। ‘द मिरर’ ने यूएन की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि बच्चों को दी जा रहे टार्चरो में उनके नाखून उखाड़ लिए जाते हैं और Private parts पर इलेक्ट्रिक शॉक लगाया जाता है, ताकि वे खुदसुपुर्दगी कर दें।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी फौज जहां एक तरफ बच्चों को हिरासत में लेकर उन्हें टार्चर करती है और उनका जिंसी इस्तेहसाल करती है, वहीं दूसरी तरफ बागी अपने फायदे के लिए इन बच्चों की भर्ती कर रहे हैं। इस लड़ाई में बच्चे कहीं से भी मफफूज़ नहीं हैं, बल्कि वे दोनों के निशाने पर हैं।

अकवाम मुत्तहदा के मुताबिक, इस लड़ाई में हजारों बच्चे अगवा किए गए हैं और कई लापता हैं। बान की मून ने दोनों फरीको से गुजारिश की है कि वे बच्चों के हुकूक की हिफाज़त करें और उन्हें तहफ्फुज़ दें। रिपोर्ट में बच्चों से मुताल्लिक एक मार्च 2011 से 15 नवंबर 2013 तक के आंकडे जुटाए गए हैं। इसमें बताया गया है कि असद की हुकूमत के खिलाफ शुरू हुई बगावत के पहले मरहले में बच्चे ज़्यादतर फौज , खुफिया तंज़ीम और हुकूमत के हामियो की तरफ से तशद्दुद के निशाने पर थे लेकिन बाद में बागी जैसे-जैसे मुनज़्ज़म होते गए, वे भी बच्चों के लिए खतरा बन गए।

रिपोर्ट के मुताबिक , खासकर 2011 से 2012 के दौरान सरकारी फौज ने बच्चों को जवान और बुजुर्ग लोगों के साथ गिरफ्तार किया और उनके साथ खराब सुलूक किया। बागियों के कब्जे वाले इलाकों में फौज ने बच्चों पर गैर इंसानी ज़ुल्म किए और सैकड़ों की तादाद में बच्चों को मौत के घाट उतारा।

अकवाम मुत्तहदा के मुताबिक, फौजी और खुफिया आफीसर बंदी बच्चों से राज़ उगलवाने के लिए उन्हें तरह-तरह से टार्चर करते हैं। इन बच्चों को बागियों से मुताल्लिक होने या उनसे हमदर्दी रखने के इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया जाता है।

ऐनी शाहिदीन के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों को मेटल की चेन, चाबुक और लकड़ी और मेटल (Metal) के डंडों से पीटा जाता है। उन्हें बिजली के झटके दिए जाते हैं। उनके पैर और हाथ से नाखून निकाल लिए जाते हैं और उनका जिंसी इस्तेहसाल किया जाता है। उनके साथ बदकारी करने की धमकी दी जाती है। उन्हें डराने के लिए उनका गला काटने का ड्रामा किया जाता है। सिगरेट से जिस्म को दागा जाता है। सोने नहीं दिया जाता है। अकेले बंदी रखा जाता है और उन्हें टार्चर करते वक्त उनके घरवालों को उन्हें यह मंज़र जबरन दिखाया जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों को ज़लील करने के लिए, उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए या उनके घरवालो को खुदसुपुर्दगी के लिए मजबूर करने के इरादे से लड़के और लड़कियों, दोनों का जिंसी इस्तेहसाल किया जाता है। बागी तंज़ीमो की तरफ से बच्चों का जिंन्सी इस्तेहसाल करने के बारे में भी कई वाकिया सामने आए हैं, लेकिन इनके दस्तावेज दस्तयाब नहीं है।

सीरिया के नायब वज़ीर खारेजा फैजल मेकदाद ने पिछले हफ्ते किसी भी बच्चे के हिरासत में होने से इनकार किया था। लेकिन रिपोर्ट में बागियों की तरफ से बच्चों का लड़ाई में इस्तेमाल किए जाने का जिक्रहै, न कि जिंसी इस्तेहसाल करने का। बागी तंज़ीम पर 12 से 17 साल तक के बच्चों को भर्ती करने का इल्ज़ाम लगा है। फ्री सीरियाई आर्मी इन बच्चों को तर्बियत देकर लड़ाई में और जांच चौकियों पर तैनात करती है। बागियों पर इल्ज़ाम है कि वे बच्चों को एक ढाल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और उन्हें फौज के हमले में सामने रखते हैं।

फ्री सीरियाई आर्मी ने भी इस इल्ज़ाम की तरदीद की है। उसके मुताबिक, वह सिर्फ 18 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को ही अपनी फौज में भर्ती करती है, लेकिन उसने यह कहा है कि शायद दिगर बागी तंज़ीम बच्चों को लड़ने के लिए तर्बियत देते होंगे।

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