Tuesday , December 12 2017

बजट में कुछ खास नहीं : नीतीश

बिहार के साबिक़ वजीरे आला नीतीश ने आम बजट को रेल बजट की तरह मायूसकुन बताया और कहा कि इसमें कोई नयापन और खास बात नहीं है। बजट में बिहार जैसे गरीब रियासतों की अनदेखी की गयी और इससे ‘अच्छे दिन’ आने के अलामत नहीं दिखायी पड़ रहे हैं। उन्हो

बिहार के साबिक़ वजीरे आला नीतीश ने आम बजट को रेल बजट की तरह मायूसकुन बताया और कहा कि इसमें कोई नयापन और खास बात नहीं है। बजट में बिहार जैसे गरीब रियासतों की अनदेखी की गयी और इससे ‘अच्छे दिन’ आने के अलामत नहीं दिखायी पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आम बजट में ढेर सारी पुरानी बातें ही हैं। नया कुछ नहीं है। लोगों को अपनी तरफ मतवज्जो करने वाली और उनके दिल में उम्मीद जगाने वाली बात नहीं दिखती।

नीतीश ने कहा कि यह पहला बजट है और यह मौका था कि वे आगे का नजरिया पेश करते और नज़रिया सामने रख सकते थे। इस बजट से वाजेह होता है कि वे अपने वादों को याद रखने वाले नहीं है और जो मंहगाई की मार झेल रहे हैं उसे अभी झेलने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इस बजट से यही पैगाम मिलता है कि उनको “भाजपा” इक्तिदार में आना था, आ गए और अब सब कुछ वैसा ही चलता रहेगा।

नीतीश ने कहा कि इस बजट में कुछ नए एलानात वजीरे खजाना ने जरुर की हैं, लेकिन उनकी क्या एक्तेसादी पॉलिसी होगी इसका वाजेह तौर पर पैगाम नहीं मिलता है। नीतीश ने कहा कि बिहार जैसे रियासत जो अपने बलबूते कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें सहारा देने के लिए रकम तो दूर कोई लफ्ज भी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि कल मरकज़ की तरफ से इक़्तेसादी सर्वे पेश किया गया था, जिससे कुछ उम्मीद जगी थी। बिहार जैसे पसमानदा रियासत की तरक़्क़ी शरह और फी सख्श आमदनी में इजाफा के मामले में बेहतर कारकरदगी रहा है। साल 2005-06 से लेकर 2011-12 तक के औसत पर नजर डाली जाये तो रियासत की तरक़्क़ी शरह मुल्क में सबसे ज़्यादा रहा है।

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