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बडगाम फायरिंग: जिंदा बच गए मुस्लिम लड़के (बासिम अमीन) ने वाकिया को याद कर फौज का दावा खारिज किया

जम्मू कश्मीर के बडगाम में पीर को फौज की गोलीबारी में बाल बाल बचे 14 साला एक लड़के का मानना है कि यह चमत्कार ही है कि वह बच गया और उसने फौज के इस दावे को खारिज कर दिया कि उनकी कार पर गोलियां चलाए जाने से पहले तीन चौकियों पर उन्हें रूकने का

जम्मू कश्मीर के बडगाम में पीर को फौज की गोलीबारी में बाल बाल बचे 14 साला एक लड़के का मानना है कि यह चमत्कार ही है कि वह बच गया और उसने फौज के इस दावे को खारिज कर दिया कि उनकी कार पर गोलियां चलाए जाने से पहले तीन चौकियों पर उन्हें रूकने का इशारा किया गया था|

बासिम अमीन ने कहा, ‘‘यह चमत्कार है कि मैं अब भी जिंदा हूं.. मैं इसके लिए अल्लाह का शुक्रगुजार हूं| ’’ बासिम को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा था. वह उन पांच लड़कों में शामिल था जो पीर के रोज़ मुहर्रम देखने के लिए कार से नौगाम से बडगाम जिले के सुथसू जा रहे थे|

ड्राइवर ने तीन चौकियों पर यह कार मुबय्यना तौर पर नहीं रोकी थी जिसके बाद फौजी अहलकारों ने उस पर गोलियां चला दी थीं| जिसके नतीजे में दो नौजवानों की जान चली गयी थी और दिगर दो ज़ख्मी हो गए थे|

फौज के दावे पर बासिम ने कहा, ‘‘हम खुशी खुशी सुथसू जा रहे थे| फैजल कार चला रहा था| उसी बीच ट्रक ने कार में टक्कर मारी| फैजल ने कहा कि वह कार संभाल लेगा…. उसी बीच फौज के एक मुलाज़्मीन ने उसकी बांह में गोली मारी| ’’ उसने (बासिम ने) कहा कि फैजल (14) कार से काबू खो बैठा और वह एक बिजली के खंभे से जा टकरायी|

उसने कहा, ‘‘तब फौजियों ने हम पर अंधाधुंध गोलियां चलायी| ’’ बासिम नसीब वाला था लेकिन उसके दो दोस्त – फैजल युसूफ और महराजुद्दीन मारे गए जबकि दिगर दो जाहिद अयूब और शकीर अहमद ज़ख्मी हो गए|

बासिम ने कहा कि फौजी तीन सिम्त से गोलियां चला रहे थे| वह खिड़की से कूदकर भागा और इस तरह उसकी जान बची|

फौज के शुमाली कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा ने आज कहा कि तीन दिन में जांच पूरी हो जाएगी और अगर फौजी नियमों की खिलाफवर्जी के मुजरिम पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी|

हुड्डा ने कहा, ‘‘मैं बिल्कुल साफ साफ कहता हूं कि जो कुछ हुआ हम उसकी जिम्मेदारी लेते हैं| ’’

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