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बड़े जानवरों की खरीदी पर क़ुरैश बिरादरी को तंग करने का सिलसिला फिर शुरू

हैदराबाद 27 अप्रैल : रियासत के बाअज़ मुक़ामात पर बड़े जानवरों की फ़रोख्त को फिर एक बार तनाज़ा में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है और इस सिलसिला में अश्रार को मुतअस्सिब सरकारी ओहदेदारों की सरपरस्ती भी हासिल है । सेक्रेट्री जमीअत

हैदराबाद 27 अप्रैल : रियासत के बाअज़ मुक़ामात पर बड़े जानवरों की फ़रोख्त को फिर एक बार तनाज़ा में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है और इस सिलसिला में अश्रार को मुतअस्सिब सरकारी ओहदेदारों की सरपरस्ती भी हासिल है । सेक्रेट्री जमीअतुल क़ुरैश मुहम्मद मुनीर कुरैशी के मुताबिक़ अश्रार ने क़ुरैश बिरादरी को फिर एक बार परेशान करना शुरू कर दिया है।

उन्हों ने बताया कि जानवर रोज़ के हिसाब से काटा जाता है और रियासत के मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर पड़ोसी अज़ला से शहर हैदराबाद को बड़े जानवर लाए जाते हैं लेकिन अब जानवर लाना क़ुरैश बिरादरी के लिए एक चैलेंज बिन गया है जब कि क़ुरैश बिरादरी अश्रार और मुतअस्सिब ओहदेदारों की मिली भगत के नतीजा में लाखों रूपयों के नुक़्सानात से गुज़र रहे हैं।

उन का कहना है कि दो रोज क़ब्ल मुहम्मद समद कुरैशी ने ज़िला सिरीकाकुलम के मौज़ा चिनतार से 6 लाख रुपये मालियती माल की खरीदी की । बाज़ार में खरीदी के बाद बाज़ाबता तौर पर रसाइद भी हासिल किए। वाज़ेह रहे कि जानवरों की खरीदी पर सरकारी तौर पर एक चिट्ठी दी जाती है।

उन्हों ने वो चिट्ठी भी हासिल की लेकिन रास्ते में एक मंसूबा बंद साज़िश के तहत कलेक्टर ने जानवरों को जब्त कर लिया और फिर उन की बरवाह गवशाला मुंतक़ली अमल में आई। क़ुरैश बिरादरी के अरकान ने इंतिहाई ब्रहमी का इज़हार करते हुए कहा कि हुकूमत और सरकारी ओहदेदारों के इलावा अश्रार में अगर हिम्मत है तो वो हर साल बैरून मुल्क भेजे जाने वाले 30 हज़ार करोड़ रुपये मालियती बड़े जानवर के गोश्त को रोक कर दिखाए।

मुनीर कुरैशी और जमीअतुल क़ुरैश के दीगर अरकान का कहना है कि मुख़्तलिफ़ तरीकों से क़ुरैश बिरादरी की हौसला पस्त करने की कोशिश की जा रही है लेकिन क़ुरैश बिरादरी ने हमेशा अवाम की ख़िदमत की है ।

कुछ अर्सा क़ब्ल तक 120 रुपये फ़ी किलो गोश्त फ़रोख्त किया जाता था लेकिन अश्रार और ओहदेदारों की मिली भगत और साज़िशों के बाइस गोश्त अब 160 रुपये फ़ी किलो फ़रोख्त किया जा रहा है।

जमीअतुल क़ुरैश का कहना है कि हुकूमत उन के मुफ़ादात के तहफ़्फ़ुज़ के लिए आगे आए और इस पसमांदा बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए इक़दामात करे और अश्रार की सरकोबी करे।

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