बनाने में गड़बड़ी, चलाने में ताखीर

बनाने में गड़बड़ी, चलाने में ताखीर
रांची सदर अस्पताल को साल 2011 में ही बन कर शुरू हो जाना था, लेकिन अब अस्पताल बन जाने के बाद भी बेकार पड़ा है। मामलाती वज़ीर की ऐलान के बावजूद इसका ऑपरेशन नहीं हो रहा है। सेहत सर्विसेस पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। दरअसल इसके तामीर में भी 36

रांची सदर अस्पताल को साल 2011 में ही बन कर शुरू हो जाना था, लेकिन अब अस्पताल बन जाने के बाद भी बेकार पड़ा है। मामलाती वज़ीर की ऐलान के बावजूद इसका ऑपरेशन नहीं हो रहा है। सेहत सर्विसेस पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। दरअसल इसके तामीर में भी 36.44 करोड़ की माली गड़बड़ियाँ हुई थी।

रियासत हुकूमत ने खुद टेंडर नहीं निकाला और काम नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को नॉमिनेशन की बुनियाद पर दे दिया था। इसकी लागत तय की गयी थी 127.66 करोड़ रुपये। बाद में एनबीसीसी ने खुद टेंडर निकाला और यह काम विजेता कंस्ट्रक्शन को 107.82 करोड़ में दिया। इस तरह हुकूमत को 19.84 करोड़ का नुकसान हुआ। यही नहीं बाद में बिल्डिंग तामीर महकमा ने अस्पताल की लागत 127.66 करोड़ से बढ़ा कर 144.26 करोड़ कर दी। इस तरह नुकसान भी बढ़ कर 36.44 करोड़ हो गया। उधर, एक नुकसान और हुआ।

हुकूमत ने अज़म जारी कर यह ऐलान कर रखा है कि हुकूमत के किसी भी काम में कंसलटेंट रखने पर उसे मुतल्लिक़ प्रोजेक्ट के मुकाममिल अखरजात की 0.74 फीसद कंसलटेंसी फीस ही देनी है। इधर, सदर अस्पताल के कंसलटेंट आर्क एंड डिजाइन को 0.74 फीसद के बजाय 2.75 फीसद की शरह से फीस का अदायगी किया गया। यानी 1.20 करोड़ के बजाय 3.97 करोड़ रुपये कंसलटेंसी फीस दी गयी। हुकूमत को इस मद में भी 2.77 करोड़ का नुकसान हुआ। यह पूरा मामला वजीर एडिटर जेनरल ने पकड़ा था और इसकी तहक़ीक़ात की सिफ़ारिश की थी, पर यह मामला निगरानी को नहीं दिया गया।

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