Monday , July 16 2018

बन्दे मातरम् के विरोधियों में एक नाम रविन्द्र नाथ टैगोर का भी..

नोबेल विजेता रविन्द्र नाथ टैगोर ने लोगों के जज़्बात समझते हुए जब सुभाष चन्द्र बोस को 1937 में ख़त लिखा तो उसमें उन्होंने साफ़ कहा कि बन्दे मातरम् का संसद में इस्तेमाल करना सही नहीं है और हम किसी पर भी कुछ भी थोप नहीं सकते.

“बन्दे मातरम् का मूल तत्व है कि ये देवी दुर्गा का श्लोक है, ये इस तरह है कि इस पर बहस हो ही नहीं सकती …किसी भी मुसलमान से हमें ये उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि दस हाथ वाली देवी को “स्वदेश” मान कर उसकी पूजा करेगा…आनंदमठ एक किताब है और उस परिवेश में ये नग़मा सही है. पर, संसद एक ऐसी जगह है जहां हर मज़हब के लोग आते हैं और उस जगह ये नग़मा (बन्दे मातरम्) सही नहीं है.” – टैगोर

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