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बम धमाके शैतानों का काम – स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य

हैदराबाद 24 फ़रवरी - दिलसुख नगर में पेश आए जुड़वां बम धमाकों की बिलालेहाज़ मज़हब और मिल्लत हर कोई मुज़म्मत कर रहा है। इन वाक़ियात में क़ीमती इंसानी जानों के इत्तिलाफ़ पर हिंदु , मुस्लिम, सिख ईसाई तमाम के तमाम रंजीदा और अफ़्सुर्दा ह

हैदराबाद 24 फ़रवरी – दिलसुख नगर में पेश आए जुड़वां बम धमाकों की बिलालेहाज़ मज़हब और मिल्लत हर कोई मुज़म्मत कर रहा है। इन वाक़ियात में क़ीमती इंसानी जानों के इत्तिलाफ़ पर हिंदु , मुस्लिम, सिख ईसाई तमाम के तमाम रंजीदा और अफ़्सुर्दा हैं।

मुख़्तलिफ़ शोबा हयात से ताल्लुक़ रखने वाली शख्सियतें इन वाक़ियात को शैतानियत, दरिंदगी से ताबीर कर रहे हैं। हिंदुस्तान में क़ौमी एकता और अमन और आतिश्ती के पयाम को आम करने में मसरूफ़ स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य से हम ने बात करते हुए हैदराबाद में पेश आए इन धमाकों के बारे में उन के ख़्यालात जानने की कोशिश की।

क़ारईन आप को बतादें कि यूपी के ज़िला कानपूर के एक ब्रहमन ख़ानदान में लक्ष्मी शंकर त्रिपाठी की हैसियत से पैदा हुए स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य ने पुरज़ोर अंदाज़ में कहा कि हैदराबाद में हुए बम धमाके इंसानों की नहीं बल्कि शैतानों का काम है।

60 साला स्वामी शंकराचार्य ने जो इस्लाम और मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने के लिए मशहूर थे। सीरते रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम और क़ुरआन मजीद के मुताला के बाद अपने मौक़िफ़ में तबदीली लाई और फिर क़ौमी यकजहती का फ़रोग़ अपना मिशन बना लिया।

कानपूर से फ़ोन पर राक़ीमुल हुरूफ़ से बात-चीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कोई भी मज़हब तशद्दुद की तालीम नहीं देता बल्कि तशद्दुद तो शैतान का काम है। इस्लाम और हिंदु धर्म भी जुल्म के ख़िलाफ़ हैं। दूसरी जानिब हुए शहर में मुख़्तलिफ़ शोबे हयात से ताल्लुक़ रखने वाले अफ़राद से बात की।

इन अफ़राद ने धमाकों के वाक़िया पर गहरे दुख का इज़हार करते हुए मीडिया के रोल पर शदीद तन्क़ीद की और कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस अंदाज़ में वाक़ियात को पेश कर रहा है जैसे इन वाक़ियात से उस का गहरा ताल्लुक़ हो।

अवाम के ख़्याल में मीडिया को अपनी सहाफ़ती ज़िम्मेदारीयों को अच्छी तरह निभाना चाहीए और इसे आम के दरमयान गलत फहमियां पैदा करते हुए माहौल को गंदा करने से गुरेज़ करना होगा।

दूसरी जानिब मुल्क की ईसाई तंज़ीमों ने भी बम धमाकों की मुज़म्मत करते हुए पुलिस और हुकूमत को मश्वरा दिया कि वो बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को हिरासत में लेने से गुरेज़ करे क्यों कि माज़ी में बेशुमार मुस्लिम नौजवानों को गिरफ़्तार किया गया था।

हक़ीक़ी ख़ातियों को कैफ़र किर्दार तक पहूँचाने के लिए ग़ैर जानिबदाराना तहक़ीक़ात ज़रूरी हैं। [email protected]

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