Saturday , December 16 2017

बरतरी और फ़ौक़ियत इत्तिफ़ाक़ी नहीं होती, जहद मुसलसल का नाम

: माईक्रो साफ़्ट इंडिया डेवलप्मेन्ट सेंटर की मैनेजमेंट एक्सलेंस कम्यूनिटी ( एम ई सी ) की जानिब से हैदराबाद कैंपस पर 500 से ज़ाइद मैनेजर्स और मुलाज़मीन के लिए एक लीडरशिप सेशन के लिए साबिक़ सदर जम्हूरीया डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम को मद

: माईक्रो साफ़्ट इंडिया डेवलप्मेन्ट सेंटर की मैनेजमेंट एक्सलेंस कम्यूनिटी ( एम ई सी ) की जानिब से हैदराबाद कैंपस पर 500 से ज़ाइद मैनेजर्स और मुलाज़मीन के लिए एक लीडरशिप सेशन के लिए साबिक़ सदर जम्हूरीया डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम को मदऊ किया गया था।

इस सेशन के सिलसिले में एक घंटे से ज़ाइद जारी रहने वाले तबादले ख़्याल और बात चीत में डॉक्टर कलाम ने लीडरशिप के बारे में अपने ख़्यालात का इज़हार किया और डी आर डी ओ और इसरो में उन्हें हासिल वसीअ तजुर्बा के बारे में बताया और अपने तजुर्बात ब्यान किए। माईक्रो साफ़्ट के अहम इक़दार से आग़ाज़ करते हुए जिस में बरतरी के कल्चर की हौसला अफ़्ज़ाई की जाती है।

डॉक्टर कलाम ने कहा कि बरतरी और फ़ौक़ियत इत्तिफ़ाक़ी नहीं होती बल्कि ये एक ऐसा अमल होता है जिस में किसी फ़र्द, तंज़ीम , या क़ौम को मुसलसल जद्दो जहद करनी होती है का बेहतरी पैदा की जा सके।

ख़ुद उन की ज़िंदगी के वाक़ियात का तज़किरा करते हुए डॉक्टर कलाम ने बताया कि किस तरह पहले SLV-3 की नाकामी से वो ज़िंदगी के चंद अहम सबक़ सीखे हैं कि एक सच्चा लीडर हमेशा नाकामियों की ज़िम्मेदारी ख़ुद अपने सर लेता है और कामयाबियों का सहरा उस की टीम के सर बांधता है।
एस सोमा सेगिर , कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेन्ट , डेवलपर डिवीज़न , माईक्रो साफ़्ट कारपोरेशन ने डॉक्टर अब्दुल कलाम का तआरुफ़ करवाया।

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